तिब्बत में जहा दो नदियों का संगम होता है वहा ऐक एसी भंयकर झील बन चुकी… — 360 Degrees — TG.ME

तिब्बत में जहा दो नदियों का संगम होता है वहा ऐक एसी भंयकर झील बन चुकी है ईसमे बीस लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और जिसके आगामी तीन दिनो में फटने कि आशंका है, और उसके बाद जो प्रलय नेपाल कि तरफ आयेगी वह ईससे भी कही भयावह होगी। यह खबर चीन दे रहा है।

नेपाल और चीन की सीमा पर बना संकट टला नहीं है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ा बैरियर लेक बन गया है. गुरुवार सुबह तक इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और झील पहले से ओवरफ्लो हो रही है. अगले तीन दिनों में और 30 लाख घन मीटर पानी आने का अनुमान है, जिससे झील के फटने का खतरा बहुत अधिक बना हुआ है.

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि हिमालय की 5,000 झीलों में अस्थिर मोरेन हैं और हिमनदी झील विस्फोट से आने वाली बाढ़ का खतरा है, जिसमें पूर्वी हिमालय अन्य क्षेत्रों की तुलना में तीन गुना अधिक संवेदनशील है।

जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे लाखों गैलन पानी को रोकने वाली प्राकृतिक चट्टान और बर्फ की दीवारें कमजोर हो रही हैं। 2023 में सिक्किम में तीस्ता घाटी में आई अचानक बाढ़ में दक्षिण ल्होनक झील टूट गई और कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग लापता हो गए।

हिमालय में लगभग 7,500 हिमनदी झीलें हैं, जिनमें से 190 को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा उच्च जोखिम वाली झीलों के रूप में चिह्नित किया गया है। बढ़ते तापमान और बर्फ के टूटने के कारण 2004 से दक्षिण ल्होनक झील का तेजी से विस्तार हुआ, जिससे अक्टूबर 2023 में हुए विस्फोट से पहले यह एक टाइम बम की तरह बन गई थी।

भारत अब लगभग 200 खतरनाक झीलों पर पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित कर रहा है और जोखिम को कम करने के लिए जलस्तर घटा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और सेना की टीमें दूरस्थ स्थलों पर तीन साल के इस मिशन पर काम कर रही हैं। नेपाल ने इससे पहले 2016 में इसी तरह की आपदा को रोकने के लिए माउंट एवरेस्ट के पास स्थित इम्जा त्शो झील का पानी सुखा दिया था।

भारत के हिमालयी राज्यों में कुल 669 ग्लेशियल झीलें पहचानी गई हैं, जिनमें से 88 पर सीधे तौर पर फटने का खतरा मंडरा रहा है।जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (62 खतरनाक झीलें): भारत में सबसे ज्यादा जोखिम यहीं है।कश्मीर घाटी: पाँच ग्लेशियल झीलों को 'बेहतर संवेदनशील' (Very High Susceptibility) माना गया है, जिनमें शोपियां जिले की भागसर (Bhagsar) झील प्रमुख है。किश्तवाड़ जिला: यहाँ अकेले 197 ग्लेशियल झीलें हैं, जिनसे चिनाब नदी बेसिन और प्रमुख हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स (जैसे पकल डुल, कीरू) को भारी खतरा है।

सिक्किम (17 खतरनाक झीलें): पूर्वी हिमालय का यह हिस्सा बेहद नाजुक है।मंगन (उत्तरी सिक्किम): यहाँ अक्टूबर 2023 में दक्षिण ल्होनक झील (South Lhonak Lake) फटने से तीस्ता नदी में भयंकर तबाही आई थी। अभी भी इस क्षेत्र की कई अन्य झीलें अत्यधिक निगरानी में हैं。

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश:चमोली और रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड): 2013 की केदारनाथ आपदा (चोराबाड़ी झील) और 2021 की चमोली आपदा इसके उदाहरण हैं। नंदा देवी ग्लेशियर के आसपास के पॉकेट्स को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है।लाहौल-स्पीति और किन्नौर (हिमाचल): सतलुज और चिनाब नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बनी झीलें निरंतर खतरे का कारण हैं।
अरुणाचल प्रदेश (12 खतरनाक झीलें): तवांग और ऊपरी सुबनसिरी जिलों में तिब्बत से आने वाली नदियों के मुहाने पर खतरा बना रहता है। भारत के मैदानी इलाकों पर असर (डाउनस्ट्रीम रिस्क)ग्लेशियल झीलें भले ही पहाड़ों पर फटती हैं, लेकिन इनका मलबे से भरा पानी भारत के मैदानी राज्यों में बड़ी बाढ़ लाता है
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August 27, 2026 2.6K 1 8