सोशल मीडिया पर एक बात अक्सर लिखी जाती है कि वर्तमान मोदी सरकार भीड़तंत्र से निपटने में अक्षम रहती है और उसके सामने झुक जाती है.
जिसके जबाब में हम जैसे राष्ट्र्वादी खेमे का ये मानना होता है कि सरकार भीड़तंत्र के सामने नहीं झुकती है बल्कि हम भीड़तंत्र के सामने झुक जाते हैं.
इसके अलावा एक ये सवाल भी जोर-शोर से उठायी जाती है कि अगर कटेशर सड़क पर उतर कर उपद्रव करने लगे तो फिर क्या होगा ?
क्या कोई सरकार उससे निपट पाएगी ??
ऐसे में सरकार तो चलो... अपने नागरिकों पर डंडा या बुलडोजर नहीं चढ़ा सकती है क्योंकि ऐसा करने पर हंगामा मचने लगेगा कि.... देखो, सरकार ने महिलाओं को मार दिया, बच्चों को मार दिया, किसानों को मार दिया, विद्यार्थियों को मार दिया.
लेकिन, डिस्टरबिंग एलिमेंट्स को आम जनता तो कूट ही सकती है. क्योंकि, ऐसा होने पर कहीं कोई खबर नहीं बननी है.
जैसे कि, उदाहरण के लिए मान लो कि... शाहीन बाग का तमाशा महीनों तक चला था और वहाँ के लोकल लोग उस रास्ते के बजाए 15 किलोमीटर दूर घूम कर जाना करते रहे...
लेकिन, कभी उसका विरोध नहीं किया कि... अरे, ये सड़क पर से मजमा हटाओ... हमको आने-जाने में दिक्कत होती है.
उसी तरह यदि ऐसा ही खिसान आन्दोलन में भी यदि लोग विरोध करते तो वो मजमा 10 दिन में ही सिमट जाता.
अगर आपको लगता है कि ये काल्पनिक बातें हैं तो आप ऐसा करो कि 100-50 आदमी जुटा कर कभी किसी मुसरिम बस्ती के मुख्य सड़क को बंद करके धरने पर बैठ जाओ.
फिर देखो कि.... सड़क खुलवाने पुलिस पहले आती है या बस्ती के लोग आते हैं.
खैर... मोदी सरकार भी अपने लोगों का स्वभाव और क्षमता पहचानती है.
इसीलिए, इस 15 अगस्त को लाल क़िले से इसके निपटारे का भी एलान हो गया.
बस ज़्यादातर लोग इस एलान को समझ ही नहीं पाए.
अब मोदी जी ने घोषणा कर दी है कि नए ज़माने के नए दिमाग़ी नक्सल से निपटने के लिए एक नई तरह की फ़ोर्स बनेगी.
जिसे Civil Defence Force कहा जायेगा.
इस बारे में बताते हुए मोदी जी ने कहा : पुरानी फ़ोर्स पुराने ज़माने के आधार पर बनी थी.
वो चीन से युद्ध के बाद बनी थी और अब नई फ़ोर्स नए ख़तरे को देखकर बनेगी.
इस फोर्स में हर शहर से लड़के लड़कियां रहेंगे.
हर महीने पैसे और फोर्स वाली पावर.
तथा, इनकी संख्या लाखों में होगी.
इन्हें civil डिफेंस volunteers कहा जाएगा.. जिन्हें सरकार प्रति दिन के हिसाब से पैसे देगी.
एक वोलेंटियर को महीने में पांच हजार से 25 हज़ार रुपए तक मिलेंगे.
ये ज़िले के डीएम के अंडर काम करेंगे.
जिसमें NCC, Scouts और संघ की शाखा से आए Gen Z को मौका मिलेगा.
जिन्हें बक़ायदा ऐसे हालात से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी.
और, ट्रेनिंग के दौरान भी इन्हें पैसे मिलेंगे.
ये फ़ोर्स बहुत कुछ होमगार्ड की तरह होगी या इज़राइल के होम फ्रंट कमांड की तरह.
अब सवाल है कि
इस फोर्स का काम क्या होगा ?
और, क्या ये गांव गाँव में तैनात होगी ?
क्या ये ‘शाहीन बाग’ जैसे हालात से निपट लेगी ?
क्या ये अमित शाह के अंडर काम करेगी ?
1. इज़रायल में होम फ्रंट कमांड और नेशनल मैनेजमेंट अथॉरिटी NEMA है.
हमारे यहां सिविल डिफेंस corps , NDMA, SDMA और DDMA है.
भारत में चीन युद्ध के बाद Civil Defence act 1968 बना.
बाद में संशोधन कर इसमें disaster management भी जोड़ा गया.
मोदी सरकार इसी में बदलाव करेगी.
‘दिमाग़ी नक्सल’ के इलाज के लिए अब Civil Defence volunteers force बनाया जाएगा.
जो होमगार्ड की तरह नहीं बल्कि इज़रायल के होमफ्रंट और NEMA की तरह चुस्त दुरुस्त और मॉडर्न होगी.
और, सबसे महत्वपूर्ण कि... युद्ध अब केवल सीमा पर नहीं लड़ा जाएगा बल्कि रिफाइनरी, बैंकिंग सिस्टम, डाटा सेंटर, फ़ैक्टरियाँ और क्रिटिकल infrastructure भी निशाना बन सकती हैं.
इसीलिए, ऐसे चुनौती से निपटने के लिए होमगार्ड जैसी सिविल डिफेंस फ़ोर्स तो नहीं चलेगी... बल्कि, इज़रायल जैसा ही मॉडल चलेगा.
गांव, ब्लॉक, फिर ज़िला , राज्य और फिर नेशनल नेटवर्क.
ऐसे सिविल फोर्स बनाने की तैयारी है.
इसे ऐसे समझिए कि.... जैसे इस वक्त डिजास्टर मैनेजमेंट NDMA से DDMA मतलब डिस्ट्रिक्ट तक है वैसे ही विलेज सिविल डिफेंस volunteers फोर्स , District सिविल डिफेंस volunteers फोर्स और फिर स्टेट सिविल डिफेंस volunteers फोर्स एंड नेशनल सिविल डिफेंस volunteers फ़ोर्स का गठन होगा.
ऐसा नहीं है कि जंतर मंतर के बाद इसे बनाने का फैसला हुआ.
बल्कि, मोदी जी के दिमाग में ये बात ऑपरेशन सिंदूर के वक्त आई.
जब बरसों बाद सिविल डिफेंस corps को एक्टिव किया गया.
244 ज़िलों में ये हुआ और तब कमियाँ दिखाई दी.
modern conflicts में equipment से लेकर communication और मैनपावर सबकी कमी दिखी.