2012 में अखिलेश यादव सरकार ने आतंकवाद/बम धमाकों से जुड़े 14 मामलों में 19 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी।
इनमें 2007 के लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद ब्लास्ट से जुड़े मामले भी शामिल थे।
सरकार का तर्क था कि कुछ निर्दोष मुस्लिम युवाओं को गलत तरीके से फंसाया गया था, इसलिए मामलों की समीक्षा/वापसी की जाए।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार की इस कोशिश पर रोक लगा दी और बाद में कहा कि कुछ मामलों में केंद्र की अनुमति के बिना राज्य सरकार मुकदमा वापस नहीं ले सकती।
इसलिए यह कहना सही नहीं है कि अखिलेश सरकार ने आतंकवादियों को जेल से छुड़ा दिया। सरकार ने केस वापस लेने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत के हस्तक्षेप के कारण सभी मामले वापस नहीं हो सके।
बाद में इन 14 मामलों में कुछ आरोपी बरी हुए और कुछ दोषी भी ठहराए गए।
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1September 2, 2026 1.8K 9