खुद पर गुस्ल वाजिब करना रोज़े की हालत में खुद पर गुस्ल वाजिब करने से रोज़ा टूट जाता है। चूंकि इस में जुर्म, नाकिस है लिहाज़ा बा'द में कज़ा लाज़िम है, लेकिन कफ़्फ़ारा वाजिब नहीं। हाँ अगर रोज़े में एक से ज़्यादा मरतबा, मसलन दूसरी या तीसरी मरतबा गुस्ल वाजिब किया, तो अब ये जुर्म बड़ा होने के सबब, सिर्फ क़ज़ा काफी नहीं, बल्कि क़ज़ा के साथ साथ कफ़्फ़ारा भी वाजिब होगा। فتاوى ہندیه: جلد 1-صفحہ 225
February 22, 2026 642