✨✨✨चितौड़गढ़ दुर्ग के बारे में जानकारी 📍✨✨
➡️ गंभीरी और बैड़च नदियों के संगम पर।
➡️ वीरविनोद के अनुसार मौर्य शासक राजा चित्रांगद ने ये किला बनाया और इसका नाम चित्रकोट रखा।
➡️मेवाड़ शासक राणा कुम्भा का शासन काल में चितौड़ अपनी समृद्धि और कीर्ति की पराकाष्ठा पर पहुंचा।
➡️ चित्तौड़ किले में विजयस्तम्भ, कुम्भश्याम मंदिर, लक्ष्मीनाथ मंदिर,रामकुंड बने हुए ।
➡️ किले में मुख्यतया सात प्रवेशद्वार पाडनपोल, भैरवपोल,हनुमानपोल(इन दरवाजों के मध्य जयमल मेड़तिया ( 6 खंभे ) कला जी राठौड़ (4 खंभे ) की छतरियां बनी है। ➡️अन्य दरवाजे गणेशपोल,जोडलापोल, लक्ष्मणपोल,सूरजपोल ( चित्तौड़दुर्ग का प्रवेश दरवाजा)।
⭐️ विजयस्तम्भ ⭐️
➡️ नौ स्तंभों वाला यह विजयस्तंभ लगभग 122 फीट ऊंचा। यह राजस्थान पुलिस, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड,शिक्षा विभाग का प्रतीक चिह्न।
➡️ इस पर 1 रुपए का डाक टिकट 15 अगस्त, 1949 को जारी हुआ।
💡उपेंद्रनाथ डे ने इसे "विष्णुध्वजगढ़" कहा।
💡फर्ग्यूसन ने इसकी तुलना रोम के स्ट्रोजन टॉवर से की।
💡डॉ गोपीनाथ शर्मा " लोकजीवन का रंगमंच कहा"।
💡आर.पी. व्यास हिन्दू प्रतिमाशास्त्र की अनुपम निधि।
💡जेम्स टॉड दिल्ली की कुतुबमीनार भले ही ऊंची हो लेकिन विजयस्तम्भ की कारीगरी उसे बढ़कर है।
💡डॉ सीमा राठौड़ संगीत की भव्य चित्रशाला।
💡 गोरी शंकर ओझा पौराणिक देवी देवताओं का अम्लीयकोष ।
💡डॉ गोएट्स भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष।
💡महाराणा कुम्भा ने मांडू (मालवा) के सुल्तान महमूद ख़िलजी पर अपनी विजय के उपलक्ष में इसका निर्माण करवाया।
यह हिन्दू देवी देवताओं का अजायबघर या विक्ट्री टॉवर कहा जाता है।
💡विजयस्तम्भ नौ मंजिला भवन है। इसमें कुल 157 सीढ़ियां है।
💡 विजयस्तम्भ की तीसरी मंजिल पर नौ बार अरबी भाषा में "अल्लाह"नाम अंकित है । इसकी सातवीं मंजिल पर स्वास्तिक का चिह्न बना है।
💡 विजयस्तम्भ का प्रमुख शिल्पी " जैता" था। इसके सहयोगी नापा, पूंजा, पोमा थे।
💡 विजयस्तम्भ कुम्भा की कीर्तियों का बखान करती है। कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति के रचयिता " अत्रि व महेश " है।
💡राजस्थान में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा किला व लिविंग फोर्ट है।
💡उपनाम सभी किलो का सिरमौर , राजस्थान का गौरव , वीरों का तीर्थ, मालवा का प्रवेशद्वार, विचित्रकूट दुर्ग, खिज्राबाद ( अलाउद्दीन खिलजी के नाम रखा)
💡 चितौड़गढ़ दुर्ग के प्रमुख मंदिर कुंभश्याम मंदिर , नीलकंठ महादेव का मंदिर, बाण माता का मंदिर ( मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की कुल देवी ), अन्नपूर्णामाता, मीरा बाई का मंदिर , तुलजाभवानी का मंदिर , कुकडेश्वर महादेव मंदिर । किले का प्रमुख जैन मंदिर सतबीस देवरी और श्रृंगार चोरी मंदिर।
💡किले की पूर्वी प्राचीर के निकट एक सात मंजिला जैन कीर्ति स्तंभ है जिसकी ऊंचाई 75 फीट ओर सीढ़ियां 54 । यह भगवान आदिनाथ का स्मारक बताया जाता है।
💡किले का भीतर अनेक कुंड और जलाशय है , उतरी हिस्से में घीतेल की बावड़ी, खातन की बावड़ी, रत्नेश्वर तालाब, कुम्भ श्याम तालाब, गौमुख झरना , हाथीकुंड ।
💡 चित्तौड़ दुर्ग को 21 जून 2013 को यूनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित किया ।
💡जौहर मेला चैत्र कृष्ण एकादशी को मनाया जाता है।
💡 चितौड़गढ़ दुर्ग पर अकबर का अधिकार 25 फरवरी,1568 ई. को हो गया था।