नाराज़ क्यों होना किसी से नज़र में रखना छोड़ दीजिए,
काम से काम रखिए बस उन्हें मनाना छोड़ दीजिए।
माफ कर दीजिए दिल से अपना गिनना छोड़ दीजिए,
बेचैन करे ख़ामोशी तो भी आवाज़ देना छोड़ दीजिए।
परवाह कर लीजिए चाहें पर जताना छोड़ दीजिए,
कैसे भी बसर करे कोई हक जताना छोड़ दीजिए।।
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