रात के दरिया में
चाँद को उतरते देखा है मैंने,
कुछ ख़्वाबों को
बिना आवाज़ बिखरते देखा है मैंने..
तुम्हारी याद की लहरें
जब किनारों से टकराती हैं,
मेरी ख़ामोशी में
कितनी सदाएँ जाग जाती हैं..
मैं डूबता रहा
तुम्हें पाने की चाह में,
और तुम
एक दूर सितारे की तरह
मेरी आँखों में चमकते रहे..
रात गुज़र भी जाए तो क्या,
कुछ रातें उम्र भर नहीं ढलतीं
वे दिल के दरिया में
चुपचाप बहती रहती हैं...!!
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