जब मनुस्मृति थी तब सावित्री ने अपने माता-पिता की मर्जी के बिना सत्यवान के साथ विवाह किया था
जब मनु स्मृति थी तब माता सीता ने स्वयंवर के माध्यम से अपना वर भगवान राम को चुना था
जब मनु स्मृति थी तब गार्गी ने वेदों की रचना में अपना योगदान दिया था
जब मनु स्मृति थी तब आपला और घोषा ने ऋग्वेद के दशम मंडल में सूक्त की रचना की थी
जब मनुस्मृति थी तो मंडन मिश्र की पत्नी भारती ने अपने पति और शंकराचार्य के मध्य
शास्त्रार्थ के निर्णायक के पद को स्वीकार किया था और अपने पति की इच्छा के विरुद्ध निर्णय देने का काम किया था
जब मनु स्मृति थी तो शंकराचार्य जी का भारती के साथ-साथ शास्त्रार्थ हुआ था और शंकराचार्य जी ने उनकी विदुता का लोहा माना था
जब मनु स्मृति थी तो एक गड़रिये की बेटी अहिल्या का विवाह एक राजा के पुत्र के साथ हुआ था
जब मनु स्मृति थी तो एक नारी देवी अहिल्या ने अपने राज्य का संचालन किया था जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है
जब मनु स्मृति थी तो जीजाबाई ने शिवाजी जैसे पुत्र का पालन पोषण करके उन्हें योग्य बनाया था जिन्होंने हिंदीस्वराज की स्थापना की थी
जब मनुस्मृति थी तो राजा के साथ राज सिंहासन पर उसकी पत्नी साथ में बैठती थी और राजकाज में अपनी भूमिका का निर्वाह करती थी
जब मनु स्मृति थी तो 22 महिलाएं ब्रह्मवादिनी के रूप में जानी जाती थी
जब मनु स्मृति थी, रानी लक्ष्मी बाई ने बचपन में ही युद्ध कौशल सीखा था और बाद में युद्ध के मैदान में अंग्रेजों के को पराजित किया था
जब मनुस्मृति थी तो भारत की संविधान सभा में 15 महिलाये बिना किसी आरक्षण के चुनकर आई थी....जिसमें वंचित समाज की भी महिलाएं थी
जब मनुस्मृति थी... तो भगवान श्रीराम को कौशल्या पुत्र और श्रीकृष्ण यशोदा नंदन के नाम से जाना जाता था.
लेकिन अब
जब संविधान से व्यवस्थाएं संचालित होती हैं
तो
महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिये आरक्षण की व्यवस्था करनी पड़ रही है
और कुछ गर्दूले कहते हैं कि मनुस्मृति महिला विरोधी है
#मनुस्मृति
81
20
15September 4, 2026 1.4K 4 12