*ह़दीस शरीफ़ - (पोस्ट न. 291)*
ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह बिन अ़म्र रद़ियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु से रिवायत है कि हुज़ूर नबीए पाक ﷺ इर्शाद फ़रमाते हैं :
> *"थोड़ा इ़ल्म ज़ियादा इ़बादत से बेहतर है और इंसान के फ़क़ीह (शरीयत का हुक़्म और क़ानून का जानने वाला) होने के लिए अल्लाह तआ़ला की इ़बादत करना ही काफी है और इंसान के जाहिल होने के लिए अपनी राय को पसंद करना ही काफ़ी है..."*
📗 त़बरानी औसत़, जि. 6/257, ह़दीस न. 8698
📕 जहन्नम में ले जाने वाले आ'माल : 32 (hindi)
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January 24, 2026 485