*ह़दीस शरीफ़ (पोस्ट न. 289)* अल्लाह (अज़्ज़ व जल्ल) के प्यारे मह़बूब सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम इर्शाद फ़रमाते हैं__ जब शैत़ान ज़मीन पर उतरा तो उस ने अ़र्ज़ की : "या रब ﷻ ! मेरा एक घर बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया : "तेरा घर हम्माम (Bathroom) है।"* उस ने फिर अ़र्ज़ की: "मेरे लिये एक बैठक बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "बाज़ार तेरी बैठक है।* " उस ने फिर अ़र्ज़ की : "मेरा एक मुनादी बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "मज़ामीर (या'नी ढोल बाजे) तेरे मुनादी हैं।* " उस ने फिर अर्ज़ की "मेरे लिये खाना मुक़र्रर कर दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "जिस (खाने की) चीज़ पर मेरा नाम न लिया जाए वोह तेरा खाना है।* " उस ने फिर अ़र्ज़ की "मेरे लिये कोई क़ुरआन बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "(बुरे) अश्आ़र (कलाम) तेरा क़ुरआन हैं।* " उस ने फिर अ़र्ज़ की "मेरी ह़दीस बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "झूट तेरी ह़दीस है।* " उस ने फिर अर्ज़ की "मेरे लिये शिकारी जाल बना दे। > *" तो अल्लाह ﷻ ने इर्शाद फ़रमाया: "औ़रतें तेरा जाल हैं।"* 📕 तख़रिज अह़ादीस अल् ह़या, जि. 6/271, ह़दीस न. 2622 📗 जहन्नम में ले जाने वाले आ'माल : 284 (हिन्दी) . . . 💚 Hamara Pyara Îslam 💚
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January 23, 2026 369 1