संभावित शोषणकारी है -
लॉ क्लर्कशिप में शक्ति के दुरुपयोग का संभावित खतरा
2 वर्ष की व्यवस्था का एक गंभीर पहलू यह भी है कि लॉ क्लर्कशिप के दौरान Trainee Judicial Officer को वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी और बाद में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के अधीन कार्य करना होगा। साथ ही, प्रशिक्षण एवं क्लर्कशिप के बाद उसकी नियमित नियुक्ति उसके प्रदर्शन के मूल्यांकन से जुड़ी हुई है।
यही व्यवस्था शक्ति और निर्भरता का असमान संबंध उत्पन्न कर सकती है। जब किसी युवा अभ्यर्थी का भविष्य, करियर और नियमित नियुक्ति काफी हद तक वरिष्ठ अधिकारी के मूल्यांकन से प्रभावित हो, तब अभ्यर्थी के लिए अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाना कठिन हो सकता है।
विशेष रूप से महिला, दलित, आदिवासी, अन्य सामाजिक / धार्मिक रूप से वंचित वर्गों तथा अन्य कमजोर परिस्थितियों से आने वाले अभ्यर्थियों के संबंध में यह प्रश्न और गंभीर हो जाता है। ऐसी संरचना में यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न या अन्य प्रकार के शक्ति के दुरुपयोग की संभावना को केवल नकारकर नहीं चल सकते।
हम यह नहीं कह रहे कि प्रत्येक न्यायिक अधिकारी ऐसा करेगा। हमारा प्रश्न व्यवस्था की जवाबदेही और सुरक्षा से है। यदि मूल्यांकनकर्ता और शक्ति-संपन्न अधिकारी के विरुद्ध ही शिकायत करनी पड़े, तो शिकायतकर्ता को निष्पक्ष और स्वतंत्र संरक्षण कैसे मिलेगा?
अगर इसके खिलाफ आवाज नही उठाई, विशेषकर महिलाओं द्वारा तो फिर ये एक शोषणकारी व्यवस्था बन जाएगी ।
किसी भी पारदर्शी लोकतंत्र में शोषणकारी संभावनाओं वाली बंद व्यवस्थाओं को लागू होने से पहले ही संवैधानिक सुरक्षा तंत्र की मांग करना अभ्यर्थियों का अधिकार और कर्तव्य दोनों है।


