यह वीडियो हैं फ़्रांस के.... जहाँ देश भर में शिक्षा व्यवस्था में सुधार… — 360 Degrees — TG.ME

यह वीडियो हैं फ़्रांस के.... जहाँ देश भर में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर वामपंथी और उनके सहयोगी संगठन और मजहबी तत्व दंगे कर रहे हैं... और आज हालात यह हो गए हैं... कि फ्रेंच सरकार को सेना बुलाने पर विचार करना पड़ रहा है.

फ़्रांस एक बेहद विकसित देश है... जहाँ अच्छा खासा पैसा शिक्षा स्वास्थ्य और अन्य Social Services पर खर्च किया जाता है.

लेकिन.... फिर भी कुछ कमियां रह ही जाती हैं... क्यूंकि Perfect System दुनिया में कहीं नहीं हो सकता.

फ्रांस में सितंबर से शुरू हुआ हाईस्कूल छात्रों का आंदोलन अब देशव्यापी विरोध में बदल गया है। छात्रों की मुख्य शिकायतें शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाएं, जर्जर स्कूल भवन, खराब सुविधाएं और शिक्षण संसाधनों की कमी हैं।

सोचिये... फ़्रांस जैसे विकसित देश में यह समस्या हैं.

हाल के दिनों में कई जगह प्रदर्शन हिंसक हो गए। वामपंथी दलों ने स्कूल के बच्चों को front पर रखा... बेहद Aggressive तरीके से आंदोलन शुरू किया... जाहिर है.. सामने बच्चों को देख कर पुलिस ने कड़ा कदम नहीं उठाया.... और इस कारण यह आग एक स्कूल से शुरू हो कर देश भर में फैल गई.

स्कूलों के बाहर आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़पें हुईं। सैकड़ों स्कूल बंद हुए हैं और 6 अक्टूबर तक 6,100 से अधिक लोगों को दंगा करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है.

सोचिये... शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात हो रही है... और सभी दंगों में फिलिस्तीन का झंडा बुलंद करके बवाल काटा जा रहा है..... Pattern तो समझ आ गया होगा ना आपको??

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 190 से अधिक छात्र, 78 स्कूल कर्मचारी और 700 से अधिक पुलिसकर्मी घायल बताए गए हैं।

अब देश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर कोक्रोच आंदोलन की बात करते है.

Ditto यही मॉडल भारत में भी अपनाया गया. Gen Z को आगे किया गया... जंतर मंतर पर धरना शुरू किया गया.... वहां से गाली गलौच... देशद्रोहियो को समर्थन देना... वामपंथी ब्रिगेड और मजहबी ताकतों का समर्थन मिलना.... सब कुछ उसी Text Book से हो रहा है.. जो आज फ़्रांस में देखने को मिल रहा है.

लोग पूछते थे.. कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात करना गलत है क्या? स्कूलों में जा कर inspection करना गलत है क्या?

नहीं.. बिलकुल गलत नहीं है.

गलत यह है.... कि यह सब काम कौन कर रहा है.. उसके उद्देश्य क्या है... उनके पीछे काम करने वाले कौन हैं.. उनके बारे में जानकारी ना रखना गलत है.

शिक्षा सुधार एक संवेदनशील टॉपिक है... हर कोई इसमें सुधार का समर्थन करेगा.... ऐसे ही सेना, किसान, जवान, महिला, कानून व्यवस्था, आरक्षण हटाओ, जाती व्यवस्था, SC ST कानून..... ये ऐसे ही मुद्दे हैं.. जिन पर हर कोई समर्थन देगा.. और सड़क पर भी उतर जाएगा.

समझना आपको है....कि सड़क पर उतार कौन रहा है... और उसका उद्देश्य क्या है. भारत में भी आंदोलन होते हैं... और उसमे होता क्या है? चाहे किसान आंदोलन हो, NEET हो, अग्निवीर के विरोध में प्रदर्शन हो... सब जगह आपको इंशाअल्लाह मिलेगा.. उमर खालिद मिलेगा... अफजल के नारे मिलेंगे..देश तोड़ने की बातें होंगी... North East को काटने की बात होंगी .... क्यों??

Pattern नहीं समझ आता आपको??

फ्रांस में पिछले दशको में अवैध घुसपैठ हुई है..... वहां भी राजनैतिक पार्टीया हैं.. जो सेकुलरिज्म के नाम पर अपने ही देश की जड़े काटने को तत्पर हैं..... आज वही पार्टियां... वही घुसपैठिये... वही असामाजिक तत्व पूरे फ़्रांस को जलाने पर आमादा हैं.

और यह कोई पहली घटना नहीं है... पिछले 10-12 सालों का trend देखिये... यूरोप के अलग अलग देशों में ऐसे ही आग लगाई जा रही है... कभी किसी फुटबॉल मैच में फ़्रांस की जीत पर... कभी घुसपैठियों के देश की हार पर... कभी नये साल के जश्न पर.. कभी शरिया लागू करने की मांग पर... कभी शिक्षा पर.. कभी बुरका ban पर.... कभी कुछ कभी कुछ.

यह सब जगह चल रहा है... भारत में भी जारी है.

बस.. भारत में एक ही बात अच्छी रही है... सरकार स्थिर रही है... और सरकार को जितनी गालियां दो... वो हर बार ऐसे आंदोलनो को ठण्डा कर देती है.

आज यह post लिखते समय भी देश भर में Election कमीशन के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं.

बस इन्हे मौका नहीं मिल रहा... देश में आग लगाने का.... वरना हमारे देश में तो इतना केरोसिन छिड़का हुआ है... कि सही मौका लगा... तो देश भभक उठेगा.

फ़्रांस की हिंसा तो कुछ भी नहीं.... भारत में इस हिंसा का स्तर कहीं व्यापक होगा.
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October 7, 2026 1.3K 4 4