दिल्ली के सत्यनिकेतन में एक building भरभरा कर गिर गई.. जिसमे 7 लोग मारे गए... कई घायल हुए.
बताया जा रहा है... कि building का निर्माण अवैध था.. क्यूंकि यहाँ G+1 बनाना ही allowed था.. लेकिन बनी हुई है G+4...वो भी बिना Building Plan के.. बिना किसी approval के.
हाहाकार मचा हुआ है.... सब Blame Game में लगे हुए हैं. उधर दिल्ली सरकार ने कड़ा action लेने को कहा है....कुछ अफसर हटा दिए हैं..... सर्वे करने और अवैध रूप से बने हुए G+4 घरों को सील किया जाएगा.
सुनने में अच्छा लगता है.... लेकिन क्या यह हो पायेगा?
कतई नहीं.... ना सरकार कर पाएगी.. ना जनता होने देगी... और ना ही विपक्ष और अन्य संगठन होने देंगे... और फिर कोर्ट तो है ही... हर बात में रोक लगाने को.
यही होता आया है... यही होगा.
इस सबकी शुरुआत कहाँ से होती है... पता है?
एक इंसान के लालच से.
जगह मिली थी G+1 बनाने के लिए..... इंसान में लालच आया... कि दो मंजिल और बना लेता हूँ... ज्यादा किराया मिलेगा.
फिर क्या था.....MCD DDA जैसी Authority के चककर लगाना शुरू.... अफसरों से बात करना शुरू... चिरोरी करना शुरू
अरे सर.... करवा दीजिये.... ले दे कर कर दीजिए ना..... देखिये 2 लाख लाया हूँ..... बता दीजिये किसको देना है.
मुफ्त का पैसा किसको बुरा लगता है?
अफसर पैसे ले लेता है.... अवैध Building बनाने की अवैध permission दे देता है.
और यह चक्र चलता जाता है
पूरा एक ecosystem बन जाता है.... फर्जी document बनाने वालों का.... अवैध permission देने वालों का... फर्जी inspection करने वालों का... Clearance देने वालों का.
और मैंने यह System खुद देखा है
लोग 1-1 फुट जगह घेरने के लिए लाखों खर्च करने को तैयार रहते हैं..... Ramp आगे बढ़वाना है.... पीछे घर में कुछ फुट जगह खुली छोड़नी की अनिवार्यता होती है... ताकि Ventillation मिले... किसी दुर्घटना के समय alternative exit होना चाहिए.... लेकिन लोग उसे ही cover करने को 2-4 लाख खर्च करने को तैयार रहते हैं
जहाँ डिमांड होती है... वहां Supply करने वाले भी पनप ही जाते हैं.
Building बन जाती है..... 20-30 साल निकल जाते हैं..... अवैध बनी है... गलत तरीके से बनी है.... Structural Deformities होती हैं... आज नहीं तो कल.. कल नहीं तो परसो... गिरनी ही है
और गिरती भी है.... और फिर कुछ दिन हल्ला होता है
दिल्ली की अवैध Buildings के जंजाल को समझने के लिए एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (M.C. Mehta v. Union of India)16 फरवरी 2006 case को समझिये.
शायद आपको थोड़ी और clarity मिले.... और यह मात्र दिल्ली की कहानी नहीं है... हर शहर, हर मोहल्ले की कहानी है.
सुप्रीम कोर्ट ने मास्टर प्लान का उल्लंघन करते हुए व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे आवासीय परिसरों को सील करने के MCD के अधिकार को बरकरार रखा।
मार्च 2006 में मॉनिटरिंग कमेटी नियुक्त हुई।
MCD ने सीलिंग अभियान शुरू किया।
व्यापारियों ने विरोध किया।
बाजार बंद हुए।
इसके बाद झड़पें और हिंसा हुई।
दिल्ली सरकार ने मिश्रित उपयोग (Mixed Use) की अनुमति देने के लिए मास्टर प्लान में अधिसूचनाओं के जरिए बदलाव की कोशिश की।
लेकिन सीलिंग जारी रही।
फिर संसद ने हस्तक्षेप किया।
दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2006 लाया गया
लोकसभा: 12 मई 2006
राज्यसभा: 15 मई 2006
राष्ट्रपति की मंजूरी: 19 मई 2006
कानून बनाया संसद ने...और अवैध building की सीलिंग को एक वर्ष के लिए रोक दिया गया।
1 जनवरी 2006 की स्थिति को आधार (Status Quo) माना गया।
इसके बाद सीलिंग अलग-अलग चरणों में फिर शुरू हुई।
सितंबर 2006 में बंद हिंसक हो गया।
सीलमपुर में लोगों की मौतों की खबरें सामने आईं।
नवंबर 2006 में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट से कहती है कि अगर सीलिंग जारी रही तो कानून-व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाएगा।
मतलब... सरकार on record कह रही है.... कि अवैध building पर action लिया तो हमारे लिए कानून व्यवस्था बनाये रखना असंभव हो जाएगा
और फिर आती है एक अस्थायी राजनीतिक राहत.... माने सीलिंग पर रोक.
वही आगे चलकर कानूनी प्रावधानों के लगातार विस्तार की शुरुआत बन गई।
2006 → लगातार विस्तार → 2011 का अधिनियम → और अंततः 31 दिसंबर 2026 तक विस्तार।
मतलब सरकार ने येन केन प्रकारेन दिल्ली में अवैध ईमारतो पर किसी भी action को रोक दिया.
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इस बीच राजनीति भी तेज हो गई।
एस. जयपाल रेड्डी ने शुरुआत में विशेष कानून का विरोध किया।
बाद में उन्होंने इसे "अस्थायी राहत" बताते हुए इसका बचाव किया।
उन्होंने कहा कि अमीर और गरीबों को "साथ-साथ रहना होगा।"
उन्होंने कहा कि कानून बनाना संसद का अधिकार है, अदालत का नहीं।
उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाने की बात भी उठाई।
जरूरत पड़ने पर संवैधानिक संशोधन की संभावना का भी उल्लेख किया।
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1September 8, 2026 1.5K 4