आज गोकुल-सा सजा है मेरा गाँव,
हर गली में श्याम का नाम है,
दीपों की कतारों में झिलमिलाता
आज जन्माष्टमी का पावन धाम है ।।
मंदिर की चौखट महक रही है,
फूलों ने ओढ़ी रंगों की चादर,
घंटियों की मधुर झंकारों में
गूँज रहा है प्रेम का सागर ।।
कहीं शंख बज रहे हैं,
कहीं मृदंग की थाप है,
कहीं राधे-राधे की धुन है,
कहीं कान्हा का जाप है ।।
आज हर माँ की आँखों में
यशोदा-सा प्यार उमड़ आया,
हर आँगन ने झूला सजाया,
हर मन ने कान्हा को बुलाया ।।
मोर मुकुट, पीतांबर की छवि,
अधरों पर मुरली की मुस्कान,
नन्हे-नन्हे कदमों से आया
आज मेरा नटखट भगवान ।।
नंद के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की!
हाथी घोड़ा पालकी,
जय कन्हैया लाल की ।!
देखो! सज गया है झूला प्यारा,
झूम रहा है सारा संसार,
फूल बरसाते हैं देवता भी,
धरती गा रही मंगलाचार ।।
दही की मटकी ऊँची बाँधी,
गोविंदों की टोली आई,
एक के ऊपर एक चढ़ते ही
हर गली में खुशियाँ छाई ।।
मटकी टूटी, दही बरसा,
जय-जयकार से गूँजा गगन,
रंगों, फूलों और प्रेम में डूबा
आज नाचा सारा जन-जन ।।
कहीं राधा की सुंदर झाँकी,
कहीं माखन चुराते श्याम,
कहीं गोकुल, कहीं वृंदावन,
हर दिशा में बस कान्हा नाम ।।
और जैसे-जैसे रात बढ़ी,
भक्ति का रंग गहराता गया,
बारह बजने का इंतज़ार
हर दिल को तड़पाता गया ।।
फिर आया वह पावन क्षण
जब घड़ी ने बारह बजाए,
शंख बजे, घंटे गूँजे,
और जयकारों ने नभ सजाए ।।
जय श्री कृष्ण!
जय श्री कृष्ण!
मेरे गोविंद नंदलाल की जय !!
फूलों की वर्षा होने लगी,
आरती का दीपक लहराया,
जैसे वर्षों के अँधियारे में
स्वयं उजाला जन्म ले आया ।।
आज जन्मे हैं मेरे कान्हा,
आज मुस्काया है संसार,
हर हृदय में प्रेम खिला है,
हर चेहरे पर है त्योहार ।।
आओ मिलकर दीप जलाएँ,
प्रेम की मटकी भर लाएँ,
भेद मिटाकर, बैर भुलाकर,
श्याम के रंग में रंग जाएँ ।।
हे मेरे गोविंद नंदलाल,
तेरा जन्मोत्सव है बेमिसाल,
तू आए तो मन वृंदावन हो,
हर धड़कन हो तेरी ताल ।।
आज न कोई दुख याद रहे,
न मन में कोई मलाल रहे,
बस बाँसुरी की धुन बजती हो
और होंठों पर तेरा नाम रहे ।।
नंद के घर आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की!
मेरे गोविंद नंदलाल की,
जय-जय, जय-जय, जय !!
आज सजे हैं मंदिर सारे,
आज सजा है सारा संसार,
हर दिल से बस यही पुकार ।।
आओ कान्हा, आओ श्याम,
रोशन कर दो हर एक धाम ।।
मेरे मन के बनो उजाले,
मेरे गोविंद नंदलाल...
मेरे गोविंद नंदलाल...!!
चंदन…✍🏼
~शब्द_श्रृंगार🖋️











