𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫 ज़िद बस उसको पाने की है हमें कहाँ ज़रूरत जमाने की… — 𝐒𝐡𝐚𝐲𝐚𝐫𝐢𝐬𝐚𝐡 ꨄ︎ — TG.ME

𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫


ज़िद बस उसको पाने की है
हमें कहाँ ज़रूरत जमाने की है

रिश्ता पुराना भी टूट सकता है
यही कीमत आजमाने की है

बहुत दिनों से देखा नहीं तुझे
यह रुत तेरे शहर आने की है

बच कर रहना जमाने से ज़रा
बुरी नीयत इस जमाने की है

अच्छी नहीं लगती खामोश तू
तुझे ज़रूरत मुस्कुराने की है

बहुत हो गया नज़रों का मिलाना
अब ज़रूरत बात बढ़ाने की है

बड़ी जंचती है सादगी तुझ पे
तू हँसती, दिल लगाने की है...!!

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September 3, 2026 126 1