मुठ्ठी में कुछ सपने लेकर, भरकर जेबों में आशाएं ।
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👉सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें, दीपक-सा जलता देखोगे…
अपनी हद रौशन करने से, तुम मुझको कब तक रोकोगे…
👉मैं उस माटी का वृक्ष नहीं जिसको नदियों ने सींचा है…
बंजर माटी में पलकर मैंने…मृत्यु से जीवन खींचा है… ।
👉मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ… मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ ..
शीशे से कब तक तोड़ोगे..
मिटने वाला मैं नाम नहीं तुम मुझको कब तक रोकोगे…
👉इस जग में जितने ज़ुल्म नहीं, उतने सहने की ताकत है…
तानों के भी शोर में रहकर सच कहने की आदत है
👉मैं सागर से भी गहरा हूँ..
तुम कितने कंकड़ फेंकोगे ।
चुन-चुन कर आगे बढूँगा मैं…
तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोकोगे..
👉झुक-झुककर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शौक नहीं..
अपने ही हाथों रचा स्वयं.. तुमसे मिटने का खौफ़ नहीं…
👉तुम हालातों की भट्टी में… जब-जब भी मुझको झोंकोगे…
तब तपकर सोना बनूंगा मैं… तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोक़ोगे............