🦚*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026*
2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।
इस दिन जन्माष्टमी व्रत रखा जाएगा और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में किया जाएगा।
📅 2026 की मुख्य तिथियां
जन्माष्टमी: शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 3 सितंबर शाम लगभग 4:55 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 4 सितंबर दोपहर लगभग 2:43 बजे
रोहिणी नक्षत्र: 3 सितंबर दोपहर लगभग 2:59 बजे से 4 सितंबर दोपहर लगभग 1:34 बजे तक
निशीथ पूजा: 4 सितंबर रात 11:57 बजे से 5 सितंबर रात 12:43 बजे तक
कई परंपराओं में व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है; पारण की विधि/समय के अनुसार अंतर हो सकता है।
*जन्माष्टमी पर 15 साल बाद बनेगा अष्टमी-रोहिणी का संयोग*
इस दिन अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे करीब 15 साल बाद होने वाला बताया जा रहा है। *धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म भी इसी संयोग में हुआ था।*
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🪷 जन्माष्टमी की पूजा कैसे करें?
1. प्रातःकाल
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान की सफाई करें और श्रीकृष्ण की बाल-स्वरूप प्रतिमा या लड्डू गोपाल को स्थापित करें।
2. व्रत का संकल्प
पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल हाथ में लेकर संकल्प करें:
“ॐ विष्णवे नमः।
अद्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये।
श्रीकृष्णप्रीत्यर्थं मम सर्वपापक्षयपूर्वकं
सर्वसौभाग्य-आरोग्य-धन-धान्य-पुत्र-पौत्रादि
समृद्ध्यर्थं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतं करिष्ये।”
फिर जल छोड़ दें।
3. दिनभर भगवान का स्मरण
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
संभव हो तो दिनभर सात्त्विक रहें और कृष्ण जन्म की कथा, भागवत या श्रीकृष्ण के भजन सुनें।
4. रात में जन्मोत्सव की तैयारी
पूजा के लिए रखें:
बाल कृष्ण/लड्डू गोपाल की प्रतिमा
पंचामृत ,दूध,दही,घी,शहद
गंगाजल/शुद्ध जल,तुलसी दल,माखन-मिश्री,फल,पंजीरी,चंदन,रोली/अक्षत,पीले वस्त्र,फूल,धूप-दीप,नैवेद्य
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🕉️ मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा
निशीथ काल में सबसे पहले भगवान का पंचामृत अभिषेक करें।
अभिषेक करते समय:
“ॐ कृष्णाय नमः।”
फिर दूध, दही, घी, शहद और अंत में शुद्ध जल से स्नान कराएं।
इसके बाद भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं।
चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी अर्पित करें।
विशेष मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।”
कम से कम 108 बार जाप करना बहुत अच्छा माना जाता है।
फिर माखन-मिश्री, फल, पंजीरी आदि का भोग लगाएं।
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🪔 जन्मोत्सव के समय क्या करें?
रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाएं।
घंटी और शंख बजाएं।
“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” बोलते हुए जन्मोत्सव करें।
फिर आरती करें।
इसके बाद श्रीकृष्ण की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
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🍚 व्रत में क्या खाएं?
यदि निर्जल व्रत संभव न हो तो फलाहार किया जा सकता है।
फलाहार में सामान्यतः:
फल,दूध,दही,मखाना,सिंघाड़े का आटा,साबूदाना,आलू,शकरकंद
मूंगफली
सेंधा नमक लिया जाता है।
अनाज और सामान्य नमक से बचना चाहिए।
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❌ जन्माष्टमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
1. मांसाहार न करें।
2. शराब/नशे से बचें।
3. अनावश्यक क्रोध और विवाद न करें।
4. किसी का अपमान न करें।
5. झूठ और छल से बचें।
6. भगवान को भोग लगाए बिना भोजन न करें।
7. तुलसी दल को बिना आवश्यकता न तोड़ें।
8. व्रत में अनाज न लें।
9. देर रात तक मनोरंजन में समय न गंवाएं—समय मिले तो कृष्ण नाम, भजन और कथा करें।
10. केवल दिखावे के लिए कठिन निर्जल व्रत न करें; अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।
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🌟 12 राशियों के लिए जन्माष्टमी के विशेष उपाय
मेष - श्रीकृष्ण को लाल/गुलाबी पुष्प अर्पित करें और 108 बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जप करें।
वृषभ - माखन-मिश्री का भोग लगाएं और गाय को हरा चारा खिलाएं।
मिथुन - भगवान को तुलसी दल अर्पित करें और ॐ क्लीं कृष्णाय नमः का जाप करें।
कर्क - दूध से भगवान का अभिषेक करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें।
सिंह - पीले पुष्प और पीले वस्त्र अर्पित करें तथा गीता का पाठ करें।
कन्या - तुलसी की पूजा करें और भगवान को धनिया/पंजीरी का भोग लगाएं।
तुला - सुगंधित पुष्प अर्पित करें और राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करें।
वृश्चिक - भगवान को मिश्री का भोग लगाकर “हरे कृष्ण” महामंत्र का जाप करें।
धनु - पीली मिठाई या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और विष्णु सहस्रनाम/गीता पाठ करें।
मकर - गरीब या जरूरतमंद को भोजन कराएं और कृष्ण मंदिर में दीपक जलाएं।
कुंभ - कृष्ण नाम का सामूहिक जाप करें और मंदिर में फल/प्रसाद चढ़ाएं।
मीन - भगवान का पंचामृत अभिषेक करके पीले फूल और तुलसी अर्पित करें।
⭐ सभी राशियों के लिए सबसे सरल उपाय
जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के सामने 11 या 108 बार:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”