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हनुमान ध्यान
वंदे वातसुतं सुबोध निलयं, वन्दे गदा धारिणम्।
वंदे रामकथा सुधा सुरसिकं, वंदे कपिंन्द्रं सदा ॥
सीताराम-पदारविन्द युगल ध्यानस्थितं सर्वदा।
वंदे संकटमोचनं खलु नृणां, श्रीराम भक्तं सदा ॥
*अर्थ :-*
मैं वायु के पुत्र हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ,
जो ज्ञान (सुबोध) के निवास स्थान हैं और गदा धारण करते हैं।
मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ, जो रामकथा रुपी अमृत का आनंद लेने वाले हैं और वानरों के राजा (श्रेष्ठ) हैं।
जो सदा सीता-राम के चरण कमलों के ध्यान में लीन रहते हैं,
और जो मनुष्यों के सभी संकट दूर करने वाले, सच्चे श्रीराम भक्त हैं – ऐसे हनुमान जी को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।
!! नवग्रह ध्यान !!
वन्देङहंच दिवाकरं ग्रहपतिं वन्दे सुधांशुं विधुं,
वन्दे भूमि सुतं सुधाकर सुतं वन्दे सुराणां गुरुम्।
वन्दे दैत्यगुरुं भृगोः सुतनयं वन्दे शनिं सूर्यजं,
वन्दे सूर्य सुतानुपीडमकरं राहुंच केतुन्तथा॥
श्री कृष्ण ध्यानं
वन्दे वेणुधरं मनोहरतनुं पीताम्बरं केशव
गोपी प्रेम निबद्धनृत्यनितरं वन्दे सुलीलाकरं, ॥
गोपी गोप जनानुराग वशगं वन्दे यशोदासुतं,
भक्तानन्द विधीत्रयञ्च सततं वन्दे ब्रजाधीश्वरम् ॥
अर्थ -
❖ मैं वेणु (बाँसुरी) धारण करने वाले, मनोहर तनु वाले,
पीताम्बर धारण करने वाले, केशव श्रीकृष्ण को नमन करता
❖ जो गोपियों के प्रेम से सदा बँधे रहते हैं और
अति सुशील लीलाओं के करने वाले हैं, उन्हें नमन करता हूँ
❖ जो गोपि और ग्वालों के प्रेम के वश में हैं,
यशोदा माता के लाल हैं, उन्हें नमन करता हूँ,
❖ जो भक्तों को आनंद देने वाले, तीनों लोकों के विधाता हैं,
ऐसे ब्रज के ईश्वर श्रीकृष्ण को मैं सदा नमन करता हूँ ॥
*!! श्री राम ध्यान !!*
वन्दे दाशरथिं महीपतिलकं सीतापतिं कामदं
कौसल्यानयनार विन्दसुखदं वन्दे जगत्पालकम्
वन्दे कोमलचेतसं रघुपतिं वन्दे च भक्तप्रियं
श्रीरामं रघुवंश भूषणमहं वन्दे दया सागरम्
टाइप ~: पंडित अंशुल उनियाल
May 12, 2026 971 1