*Happy_fathers_day*
पिता जी के लिए लिखना शुरू करूं तो लिखते लिखते शब्द के साथ उम्र भी कम पड़ जायेगी ।
फिर भी father's day पर टीजर के रूप में कुछ लेख लांच कर रहे हैं और समय आने पर लेख ट्रेलर और पिक्चर के रूप में आती रहेगी।
हमारे जैसे परिवार के लड़के '"पिताजी"' को... अपना पहला *गुरु* ...पहला *हीरो* ... *रोल मॉडल.* ...मानते हैं।
अपने जीवन के पूरे संघर्ष के सभी कठिनाइयों , बाहरी समस्या और हमारे बीच आने वाला केवल एक मात्र *सच्चा सुपर हीरो* मानते तो है लेकिन कह नहीं पाते....
हमारे जैसे लडको का पिता और पुत्र के मध्य एक ऐसा संबंध होता है जिसे शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता ....फिर भी.......
हम जैसे लड़के बाप को गले नहीं लगाते। बाप के गालों को नहीं चूमते और न ही बाप की गोद में सर रख कर सुकून से सोते हैं। हमारा पिता और पुत्र का संबंध हमेशा मर्यादित होता है।
बाहर रहने वाले लड़के अक्सर जब घर पर फोन करते हैं तो हमेशा बात मां से होती है ....पीछे से कुछ दबे-दबे शब्दों में पिताजी भी कुछ कहते हैं, सवाल करते हैं या सलाह तो देते ही हैं। पिता जी की तबीयत से लेकर उनके सारे हालचाल भी माँ से ही पूछते है।
जब कुछ नहीं होता कहने को तो... खांसने की हल्की सी आवाज उनकी मौजूदगी दर्ज करवाने के लिए काफ़ी होती है... बाप की ख़राब होती तबियत का हाल भी लड़के मां से पूछते हैं और दवाइयों की सलाह, परहेज इत्यादि बात भी लड़के मां के द्वारा ही बाप तक पहुंचाते हैं...
जैसे बचपन में कहीं चोट लगने पर मां से लिपट कर रोते थे... वैसे ही जवानी में लगी ठोकरों के कारण अपने बाप से लिपट कर रोना चाहते हैं, अपनी और अपने पिता की टेंशन आपस में साझा करना चाहते हैं, परन्तु ऐसा कर नहीं पाते...।
बाप और बेटे शुरुआत से ही एक दूरी में रहते हैं, दूरी *अदब* की, लिहाज की, *संस्कार* की या फिर जनरेशन गैप की कह लो। हर बेटे का मन करता है कि वो इन दूरियों को लांघता हुआ जाए और अपने बाप को गले लगा कर बाप से कहे की हम तुमसे बेइंतहा और बेशुमार प्यार करते है... !!
पिता के साथ *फ्रेम* में आने का हर लड़के का सपना होता है... मगर लड़के यह कर नहीं पाते... वो मां से जितना प्यार करते हैं बाप का उतना ही सम्मान, अदब और लिहाज करते हैं... और ये सम्मान और लिहाज की दीवारें इतनी बड़ी हो चुकी है कि इनसे पार पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
अपनी कोई छोटी उपलब्धि का भी साझा माँ से करते है और बाप की शाबाशी लेने मे भी एक झिझक बनी रहती है।
उनके गले लगना आज भी पहली इच्छा है। उनके साथ खड़े होकर सेल्फी लेना आज भी पहली इच्छा है ।❤️
जिस दिन पिता की आँखों के आंसू नहीं, उनकी ख़ुशी बनने के काबिल हो जाएँ, वही दिन पिता का दिन है।
जिस दिन हम कह सकें - मै हूं न बाबूजी -
वहीं दिन *Happy fathers day* होगा।
✍️ *Chauhan sir*