कुछ मरेंगे घरों में, कुछ स्कूलों में, तो कुछ पुस्तकालयों में ही दम तोड़ देंगे। जो बचेंगे, वे परीक्षा की कतारों में मरेंगे और जो वहाँ भी बच गए, वे पेपर लीक की खबरों में अपना भविष्य मरता देखेंगे। कभी बाढ़ ले जाएगी, कभी भुखमरी निगल जाएगी, तो कभी इमारतों के ढहने से जिंदगियाँ मलबे में दब जाएँगी। कुछ पंखों से लटककर अपनी जिंदगी खत्म कर देंगे, कुछ लाठीचार्ज में मारे जाएँगे और कुछ अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देंगे, क्योंकि तुम्हारी एम्बुलेंस से पहले मंत्री का काफिला निकाला जाएगा। कुछ परीक्षा रद्द होने से टूट जाएँगे और जो फिर भी किसी तरह बच गए, वे घर लौटते समय अपने भीतर पलते अवसाद से हार जाएँगे।
यहाँ जिंदा कोई नहीं बचेगा। Dipesh jangid jhunjhunu
Forwarded fromमदन
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3September 8, 2026 2.1K 6 13