*"बेटी बेचने का सरकारी रेट फिक्स: ₹25 लाख" - इलाहाबाद HC का ऐतिहासिक फैसला*
*प्रयागराज, 11 अगस्त 2026*
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज पारिवारिक रिश्तों की नीलामी कर दी। रेट भी बता दिया - *₹25 लाख प्रति बेटी*।
खरीददार: यूपी सरकार + लाचार बाप।
दिया और अंशु। दो लड़कियां। घर में पली-बढ़ी। बाप ने खून-पसीना एक करके पढ़ाया-लिखाया।
फिर एक दिन दोनों ने कहा "हमने इस्लाम कबूल कर लिया"।
बाप घबराया, समझाया, रोका। क्योंकि कोई भी बाप अपनी 20 साल की बेटी को रातों-रात "गायब" होते नहीं देख सकता।
बेटियां कोर्ट गईं। आरोप: "पापा ने घर में बंद कर दिया"।
कोर्ट ने मान लिया। सजा सुनाई: *बाप दे ₹12.5 लाख। सरकार दे ₹12.5 लाख। कुल ₹25 लाख।*
*हाईकोर्ट के 3 नए कानून*
1. *"बाप होना अब महंगा शौक है"*
पहले बाप की जिम्मेदारी: फीस, दहेज, शादी।
अब नई जिम्मेदारी: अगर बेटी धर्म बदले तो "रिलीज फीस" भी दो।
कोर्ट का लॉजिक: रोका क्यों? पैसा दो।
2. *"परिवार = जेल, कोर्ट = दलाल"*
घर में समझाना अब "अवैध हिरासत" है।
कोर्ट के हिसाब से बाप को चाहिए था कि ताली बजाकर विदा कर देता और साथ में चेक भी काट देता।
3. *"धर्मांतरण पर सब्सिडी योजना"*
सरकार भी देगी। मतलब टैक्स का पैसा लेकर धर्म बदलवाओ।
कल को कोई कहेगा "नौकरी नहीं मिली, धर्म बदलता हूं, ₹25 लाख दो"। कोर्ट मना नहीं कर पाएगा।
"साहब, मैंने बेटियों को पाला। धोखे से नहीं।
आज कोर्ट ने बता दिया कि 20 साल की परवरिश की कीमत ₹12.5 लाख है।
अगली बार से बेटी पैदा करने से पहले EMI का इंतजाम करके रखूंगा।"
ये फैसला क्या कहता है?*
ये फैसला "आजादी" का नहीं है। ये *"परिवार तोड़ो, पैसा जोड़ो"* योजना है।
हाईकोर्ट ने बालिग होने की बात सही कही। पर ये भी पूछना था - "धर्म परिवर्तन के पीछे कौन है? दबाव है या मर्जी?"
बिना जांचे, बिना सुने सीधा बाप पर जुर्माना और सरकार पर इनाम।
आज बाप की जेब कटी है। कल आपके घर की बारी है।
"भारत में अब बेटी बचाओ नहीं चलेगा। बेटी के बदले चेक लो।"