फीफा कप और संयम स्पेन 🇪🇸 ने फीफा विश्व कप 2026 जीत लिया है। फ्रांस… — Yunus Khan Official — TG.ME

फीफा कप और संयम

स्पेन 🇪🇸 ने फीफा विश्व कप 2026 जीत लिया है। फ्रांस और अर्जेंटीना जैसी मोस्ट वेटेड टीमों को हराकर स्पेन का इस खिताब को जीतना कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है। फ्रांस और अर्जेंटीना की जीत की संभावनाओं की पीछे मुख्य वजह उनके पास क्रमशः एम्बापे और मेसी का होना था जबकि स्पेन के पास एक भी ऐसा बड़ा नाम नहीं था। बावजूद इसके उसके विजेता बनने के पीछे क्या वजह थी?

फुटबॉल की दुनिया में जब बड़े खिलाड़ियों की चर्चा होती है और सामान्यतः जो खिलाड़ी ज़्यादा फेमस हुए उनमे पेले, मैराडोना, रिवाल्डो, रोनाल्डो नज़ारियो, रोनाल्डिन्हो, मिरोस्लाव क्लोस, लुईस सुआरेज, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, मैसी, नेमार, किलियन एम्बापे, मो सालाह, रहीमी, विनी जूनियर, अर्लिंग हालैंड, लामिने यमाल आदि के नाम शुमार हैं। ये सभी खिलाड़ी फॉरवर्ड पोजीशन (अटैकिंग पोजीशन) वाले खिलाड़ी रहे हैं जिनके पास गोल करने के सबसे ज़्यादा अवसर होते हैं। इसका सीधा अर्थ है कि ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की लोकप्रियता बाक़ी खिलाड़ियों से ज़्यादा है।

क्या इसका मतलब हम ये समझें कि बाक़ी पोजीशन पर रहने वाले खिलाड़ियों मतलब मिडफील्डर और डिफेंडर का महत्व स्ट्राइकर्स की तुलना में कम है ?

जब आप फीफा कप 2026 का विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। स्पेन ने यह विश्व कप अपने डिफेंडर्स की वजह से जीता है, स्ट्राइकर्स की वजह से नहीं। पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने केवल एक गोल खाया है। इस टीम के डिफेंडर्स ने विरोधी टीमों को गोल करने के मौके दिए ही नहीं। स्पेन ने यह खिताब अपने संयम से जीता है, आक्रामकता से नहीं।

क्या आप जानते हैं कि इस टूर्नामेंट का गोल्डन बॉल (Best Player या Player of the tournament) अवार्ड किसे मिला? ये अवार्ड स्पेन के कप्तान रोड्री जीतते हैं जो सेंटर डिफेंस पोजीशन पर खेलते हैं।
यही नहीं Best Young Player का अवार्ड पाऊ कुबारसी (स्पेन) ने जीता और मजे की बात ये है कि ये भी डिफेंस पोजीशन पर खेलते हैं।

बात सिर्फ इतनी सी है कि आक्रामकता के अपने मायने हो सकते हैं लेकिन संयम का अपना महत्व है। बिना संयम के आप कभी बड़ी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते। आक्रामकता भी केवल तभी उपयोगी हो सकती है जब उसमें संयम का उचित मेल हो। बिना संयम के आक्रामकता के कोई मायने नहीं।

विद्यार्थी जीवन में तैयारी के दौरान आक्रामकता आपको आगे लेकर जाती है लेकिन बिना धैर्य वाली आक्रामकता back fire कर देती है। बिना आक्रामकता के सफलता प्राप्त की जा सकती है लेकिन बिना संयम के नहीं।
संयम सफलता की कुंजी है।

यूनुस ख़ान

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Yunus Khan Official
Assistant Professor in Political Science
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