इस देश में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत है लेकिन यहां नेताओं को लोगों को एक दूसरे से भिड़ाने से फुर्सत नहीं मिलती। अभी 2 दिन पहले इस लड़की की खबर कुछ एक मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की लेकिन किसी भी नेता चाहे वो सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं समझा।
सच बात यह है कि नेताओं को हमेशा वे मुद्दे पसंद होते हैं, जहां लोग एक दूसरे से लड़ें। और यही हो रहा है 2 दिन से। एक ऐसी लड़की के मुद्दे को हाइलाइट करके विपक्ष आंदोलन कर रहा है जो स्वयं निम्न स्तरीय राजनीति में संलिप्त है। यहाँ मैं उस लड़के के समर्थन में नहीं हूँ, उस लड़के के समर्थन में भी विपक्ष जैसी सोच वाले सत्ता पक्ष के नेता साथ खड़े हुए हैं।
मेरा सवाल इन सबसे है कि क्या निशु आजाद और स्वतंत्र भारद्वाज का मुद्दा देश की मूलभूत समस्याओं से ऊपर है???? मूर्खता की भी हद होती है, और सबसे बड़े मूर्ख वो हैं जो इन दोनों के समर्थन में खड़े हैं।
इन नेताओं से ज्यादा देश की बर्बादी में हम सभी अविवेकशील नागरिकों का योगदान है। इतना टॉक्सिक माहौल आप सबने बना दिया है कि कोई किसी को समझने को तैयार ही नहीं है।

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1September 5, 2026 1.1K