जो लोग आरक्षण खत्म करने या उसमें सुधार करने की बात कर रहे हैं, वो यह जान लें कि बिना जातिगत आर्थिक जनगणना के यह संभव नहीं।
और जातिगत आर्थिक जनगणना के बाद देश की राजनीति पूरी तरह से बदल जाएगी।
इसलिए ही बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख आरक्षण के विरोध में नहीं हैं।
यह भी संभव है कि आने वाले समय में जातिगत आर्थिक जनगणना के बाद आरक्षण का अनुपात पहले से अधिक हो जाए और सवर्ण समाज 20 से 30% दायरे में ही सिमट कर रह जाए।
उसका सबसे बड़ा कारण है कि ओबीसी तबका बहुत लंबे अरसे से जातिगत जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने के मांग करते आ रहा है। जातिगत जनगणना के आंकड़े आते ही राजनीतिक रूप से दलित और ओबीसी संगठन देश में बहुमत में होंगे। और यही कारण है कि बीजेपी ने अपनी राजनीति के केंद्र में दलित और ओबीसी को शामिल कर दिया है।
ये मजाक नहीं है, बल्कि कटु सत्य है।
मैं न तो किसी पार्टी का समर्थक हूं और न विरोधी। ना मुझे आरक्षण से कोई फर्क पड़ता है और न मैं इसके विरोध में हूं।
मैं तो खुद को इस काबिल बनाने में लगा हूं कि आने वाले सालों में भारत से बाहर किसी विकसित देश में खुद को स्थापित कर सकूं और यही मैं अपने बच्चों को सिखाऊंगा। भारत की दुर्दशा के जिम्मेदार यहाँ के सभी वर्गों के लोग हैं और अब नहीं बदलना मुझे किसी भी व्यक्ति को, मैं अपने आप में बदलाव ला रहा हूं।
परेशान हो चुका हूं यार यहां की निम्न स्तरीय राजनीति देखकर। अब और नहीं झेला जाता मुझसे।
जिस देश में हर इंसान के मन में एक दूसरे के प्रति विद्वेष और नफरत हो वो कभी तरक्की नहीं कर सकता।
है प्रीत जहां की रीत सदा.....
ये सिर्फ गीतों में अच्छा लगता है, धरातल पर तो सिर्फ जलन और नफरत है सबके मन में।
इस देश में अगर हर जाति से चंद बुद्धिजीवी लोग हो जाते तो शायद सामंजस्य बन जाता लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यहाँ हर व्यक्ति अपनी जातिगत महत्वाकांक्षाओं को लिए घूम रहा है।
इसलिए ही मेरा मन हर वर्ग से हट चुका है।
आप चाहे तो मुझे स्वार्थी कह सकते हैं, गालियाँ भी दे सकते हैं लेकिन जो सच है वो मैंने आज कह दिया।
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3August 24, 2026 4.6K 5