प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित विषय पर यदि लिखना हो तो प्रस्तावना कुछ ऐसी हो सकती है ............... "सन्नाटे को चीरती हुई एक ऐसी गड़गड़ाहट गूँजती है, जिसे सुनकर सदियों से शांत खड़े पहाड़ भी काँप उठते हैं। पलक झपकते ही लांगटांग लिरुंग की बर्फीली ऊंचाइयों से चट्टानों और ग्लेशियर का एक विशालकाय हिस्सा टूटकर नीचे गिरता है। हवा में बर्फ का गुबार है और धरती ऐसे डोलती है मानो कोई शक्तिशाली भूकंप आया हो। कुछ ही मिनटों में, घाटी की जीवनदायिनी ल्हेंडे खोला नदी मलबे के जाल में घुटकर एक हिंसक कृत्रिम झील का रूप ले लेती है। और फिर... जब प्रकृति का सब्र टूटता है, तो लाखों टन पानी, कीचड़ और मलबे का एक ऐसा सैलाब नीचे की बस्तियों की तरफ दौड़ता है जो इंसानों को संभलने का एक पल भी नहीं देता। टेलीग्राम का बेस्ट चैनल ज्ञान सर का स्टडी फाॅर सिविल सर्विसेज है । नेपाल की यह हालिया त्रासदी केवल एक खबर नहीं है; यह इंसानी बस्तियों के ठीक ऊपर लटकती प्रकृति की उस नंगी तलवार का साक्षात् दृश्य है, जिसे हमने खुद 'ग्लोबल वॉर्मिंग' की भट्टी में तपाकर धारदार बनाया है। यह जलप्रलय चीख-चीख कर कह रहा है कि प्रकृति से हमारा खिलवाड़ अब केवल पर्यावरण की चिंता नहीं, बल्कि हमारे वजूद को मिटाने का साक्षात् काल बन चुका है।" for GIC MAINS
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