मेरा परिचय मोहन राकेश से ‘आषाढ़ का एक दिन’ के माध्यम से हुआ था, चूँकि… — My Book Reviews! — TG.ME

मेरा परिचय मोहन राकेश से ‘आषाढ़ का एक दिन’ के माध्यम से हुआ था, चूँकि यह मेरा पहला नाटक था, इसलिए मुझे काफी पसंद आया। जब उनका लेखन अच्छा लगा, तो उनकी अन्य रचनाएँ पढ़ने में भी क्या दो राय हो सकती थीं?? इसी उत्सुकता में मैंने ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ का संकलन उठाया, जिसमें उनकी 9 प्रिय कहानियाँ संकलित हैं विडंबना यह है कि यह “प्रेम” केवल मोहन राकेश तक ही सीमित रह गया, पाठक के रूप में मुझे ये कहानियाँ अपेक्षाकृत सामान्य लगीं। मोहन राकेश स्वयं आर्थिक संघर्षों और मध्यवर्गीय जीवन की जटिलताओं से परिचित थे, जिसकी स्पष्ट छाप उनकी कहानियों में दिखाई देती है, वे व्यक्ति के अंतर्मन और उसके द्वंद्वों को गहराई से समझते थे, और यह समझ उनके पात्रों के माध्यम से स्पष्ट रूप से उभरकर आती है, और कुछ कहानियों में यह प्रभावशाली ढंग से प्रखर होता है, पर संपूर्ण रूप से यह संकलन मुझ पर वैसा प्रभाव नहीं छोड़ पाया, जितनी मैंने उससे अपेक्षा की थी।।

❤4
June 5, 2026 525