वेदांत के एक ऐसे विद्यार्थी जो आत्म-साक्षात्कार की चाह रखते हैं। यह… — Self Help books — TG.ME

वेदांत के एक ऐसे विद्यार्थी जो आत्म-साक्षात्कार की चाह रखते हैं। यह रचना 'योग-वशिष्ठ रामायण' का संक्षिप्त सार है, जिसमें शुरुआती 'वैराग्य' (मोह-माया से दूरी और त्याग) से लेकर अंतिम 'निर्वाण' (मोक्ष) तक की मुख्य शिक्षाओं को कुछ स्पष्ट और व्यापक शीर्षकों के अंतर्गत समझाया गया है। दुनिया की असत्यता, वासनाओं और मन के खत्म होने से मिलने वाली शांति, शुद्ध आत्मा का असली स्वरूप और उसे पाने का तरीका, चिंतन, जीवनमुक्ति और निर्वाण पर की गई चर्चाएँ बहुत ही बेहतरीन ढंग से लिखी गई हैं। ये बातें लेखक की गहरी समझ को दर्शाती हैं, जिन्होंने अपना ज़्यादातर जीवन इन्हीं सच्चाइयों की खोज में बिताया है। वेदांत का ज्ञान पाने की चाह रखने वाले आम आदमी के लिए 'योग-वशिष्ठ' जैसी गूढ़ रचना का पूरा लाभ उठाना आसान नहीं है। -गोपीनाथ कविराज

August 23, 2026 460