भाग्य और नियति – फर्क समझिए, फिर पढ़ने बैठिए कल एक अभ्यर्थी ने कहा – "सर, लगता है सिलेक्शन किस्मत वालों का ही होता है।" मैंने पूछा – कितने mock देते है? जवाब नहीं मिला। बस यहीं सारा खेल है। भाग्य कहता है – जो लिखा है वही होगा। नियति कहती है – जो तुम लिखोगे वही होगा। भाग्य इंतज़ार सिखाता है, नियति मेहनत। जो प्रीलिम्स में fail होने के बाद answer key नहीं, कुंडली देखता है – वो अगले साल भी वहीं खड़ा मिलता है। और जो अपनी गलतियों की लिस्ट बनाता है, वो अगली लिस्ट में अपना नाम देखता है। गीता में कृष्ण ने सिर्फ इतना नहीं कहा कि फल की चिंता मत करो। आगे ये भी कहा – _मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि_ – अकर्मण्यता से मोह मत रखो। मतलब हाथ पर हाथ रखकर बैठना भी एक लत है, और सबसे खतरनाक लत। एकलव्य को गुरु नहीं मिला, फिर भी युग का सबसे बड़ा धनुर्धर बना। अरुणिमा सिन्हा ने पैर खोकर एवरेस्ट चढ़ा। इन्हें भाग्य नहीं मिला था – इन्होंने नियति खुद गढ़ी थी। याद रखिए, UPPCS 2026 भाग्य की परीक्षा नहीं है। वहाँ negative marking तुक्के को सज़ा देती है और तैयारी को इनाम। आपकी OMR हथेली की लकीरों से नहीं, मेहनत की स्याही से भरती है। रोज़ की पढ़ाई को अपना कुरुक्षेत्र बनाइए। NCERT और standard books आपके अस्त्र हैं, current affairs आपकी दृष्टि, revision आपका अभ्यास और mock tests आपका युद्धाभ्यास। जिस दिन मन कहे "आज रहने दो, जो भाग्य में होगा वही होगा" — उस दिन समझ लीजिए कि अकर्मण्यता ने द्वार खटखटाया है। उसे उत्तर दीजिए: "मेरा भाग्य मेरी पुस्तकों के पन्नों में लिखा है, और उसे पढ़ने वाला मैं स्वयं हूँ।" तो जिस दिन मन कहे – "आज रहने दो"... उस दिन बस इतना याद रखना – भाग्य उनका बहाना है जो रुक गए, नियति उनका संकल्प है जो चल पड़े। चरैवेति चरैवेति 🚩 – RWA Civil Services
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