जब कोई विद्यार्थी मुझे पूछता है न की सर कितने घंटे पढ़ें ? तब मेरे ज़ेहन में आता है कि पढ़ने वाले ये सवाल तो नहीं करेगा , ये सवाल वो करते है जो केवल पढ़ने की मानसिक योजनाएं बनाते है , उनको लागू करने का अनुशासन नहीं रखते । जबकि होना तो ये चाहिए की आप एक विद्यार्थी के रूप में पढ़ने के अलावा क्या कार्य करते है ? अगर कोई कार्य नहीं कर रहे है तो फिर जब तक न थक जाते पढ़ते जाएँ , घंटे काउंट करके क्यों पढ़ना है ? ये कोई टैक्टर थोड़ी है की खेत में इतने घंटे चला है उस अनुसार भुगतान करना है। मुझे नहीं लगता कोई गंभीर अभ्यर्थी पढ़ने के लिए घंटे काउंट करता होगा , हाँ ये अवश्य है की सुबह , दोपहर और रात्रिकाल की शिफ्ट अनुसार शेड्यूल दिमाग़ में ज़रूर होना चाहिए , जिसमें आपको एप्रॉक्सिमेट लगें की इतने घंटे तक पढ़ाई हो जाती है । अतः पढ़िये , पूरा समय पढ़िये , आँखें और दिमाग़ के थक जाने तक पढ़िये , पढ़ाई के अलावा के कार्य के घंटे काउंट कर लीजिए शेष टाइम आप मुख्य कार्य पर लगाएं । ✍️ डॉ गणपत सिंह राजपुरोहित
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