Riseup Classes [RAJASTHAN]: post #5248 — TG.ME

चिमनी की रोशनी से असिस्टेंट प्रोफेसर तक… गणेश जी की यह सफलता मेरे लिए केवल एक परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी यादों को फिर से जीवंत करने वाला क्षण है। RPSC द्वारा आयोजित Assistant Professor (History) में Rank 63 से उनका चयन हुआ है, लेकिन इस सफलता के पीछे का संघर्ष मैंने बहुत करीब से देखा है। बी.ए. प्रथम वर्ष में हम दोनों सहपाठी थे। मुझे आज भी वह बात याद है—मैं परीक्षा के दिनों में ‘वन वीक सीरीज’ पढ़ रहा था और गणेश जी प्रथम वर्ष की सभी मूल किताबें पढ़ते थे। मेरी वन वीक देखकर उन्होंने मेरे पिताजी से शिकायत तक कर दी थी कि “पुष्पेंद्र वन वीक पढ़ रहा है।” तब शायद मुझे यह बात सामान्य लगी, लेकिन बाद में उसी शॉर्टकट का खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा। UGC NET उत्तीर्ण करने के बावजूद मैं गुड एकेडमिक रिकॉर्ड नहीं होने के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर में फॉर्म तक नहीं भर पाया था। गणेश जी की आर्थिक परिस्थितियाँ ऐसी थीं कि उन्होंने कमठे पर मजदूरी की, मात्र 3500 रुपये में निजी विद्यालय में पढ़ाया। घर में बिजली नहीं थी तो चिमनी की रोशनी में पढ़े। टेबल खरीदने के पैसे नहीं थे तो कबाड़ी से पुराने कूलर का हिस्सा लाकर उसे ही पढ़ने की मेज बना लिया और मित्र की दी हुई कुर्सी पर बैठकर अपने सपनों को आकार देते रहे। असफलताएँ भी बार-बार मिलीं, लेकिन गणेश जी नहीं रुके। आज जब उसी पुराने सहपाठी का RPSC Assistant Professor (History) में Rank 63 से चयन देखता हूँ, तो मन से खुशी होती है। जिस गणेश को मैंने बी.ए. प्रथम वर्ष में पूरी-पूरी किताबें पढ़ते देखा था, उस समय ज्यादातर साथी वन वीक सीरीज ही पढ़ते थे, उनकी वर्षों की तपस्या आज सफलता बनकर सामने खड़ी है। चिमनी की रोशनी छोटी जरूर थी, लेकिन गणेश जी का सपना और हौसला हमेशा बड़ा था। पुराने सहपाठी और मित्र गणेश जी को इस शानदार सफलता के लिए हृदय से बधाई। आपका संघर्ष हजारों विद्यार्थियों को यह विश्वास देगा कि परिस्थितियाँ कमजोर हो सकती हैं, लेकिन इरादे मजबूत हों तो मंजिल एक दिन जरूर मिलती है। - पुष्पेंद्र बेनिवाल

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August 29, 2026 3.7K 5