गुर्जर-प्रतिहार शैली या महामार्ग शैली :
➟ 8वीं से 11वीं सदी तक का काल ‘गुर्जर-प्रतिहारों’ का काल है, जो कि स्थापत्य कला की दृष्टि से ‘राजस्थान का स्वर्णकाल’ कहलाता है।
➟ गुर्जर-प्रतिहारों के द्वारा क्षेत्रीय मंदिर स्थापत्य शैली का विकास किया गया, जिसे ‘महामार्ग शैली’ कहा गया।
➟ ओसियां (जोधपुर) में स्थित महावीर जी मंदिर (निर्माण 8वीं शताब्दी में प्रतिहार राजा वत्सराज द्वारा) अब तक का गुर्जर-प्रतिहार शैली का सबसे प्राचीन जैन मंदिर है।
➟ गुर्जर-प्रतिहार शैली / महामार्ग शैली में निर्मित मंदिर—
(i) ओसियां (जोधपुर) के सूर्य मंदिर, महावीर मंदिर तथा हरिहर मंदिर
(ii) कालिका माता मंदिर (चित्तौड़गढ़)
(iii) मरकड़ी माता मंदिर, निमाज (ब्यावर)
(iv) कामेश्वर मंदिर, आऊवा (पाली)
(v) रणछोड़ जी का मंदिर, खेड़ (बाड़मेर)
(vi) हर्षद माता मंदिर, आभानेरी (दौसा)
(vii) दशमाता मंदिर, गोठ मांगलोद (नागौर)
(viii) आदिवराह मंदिर, आहड़ (उदयपुर)
(ix) नीलकंठ मंदिर, राजोरगढ़ (अलवर)
(x) नीलकंठेश्वर मंदिर, जसनगर (नागौर)
(xi) हर्षनाथ मंदिर, रेवासा (सीकर)
(xii) नकटी माता मंदिर, जयभवानिपुर (जयपुर)
(xiii) घटेश्वर मंदिर, बाडोली (चित्तौड़गढ़)
(xiv) सोमेश्वर मंदिर, किराडू (बाड़मेर) — गुर्जर-प्रतिहार शैली का अंतिम मंदिर
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1February 16, 2026 16.1K 65