छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले का हिंदी सारांश यह मामला Ekta Chandrakar बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य से संबंधित है। फैसला 27 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर के न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने दिया। 🔹 मामला क्या था? याचिकाकर्ता ने व्याख्याता (Lecturer) पद के लिए परीक्षा पास की थी और दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था। लेकिन उसकी उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज कर दी गई कि उसने एक ही शैक्षणिक वर्ष में दो डिग्रियां प्राप्त की थीं—एक B.Ed. नियमित माध्यम से और दूसरी M.Sc. दूरस्थ/ओपन मोड से। 🔹 याचिकाकर्ता का तर्क याचिकाकर्ता ने कहा कि UGC की 2012 अधिसूचना और 2022 की “Guidelines for Pursuing Two Academic Programmes Simultaneously” के अनुसार एक विद्यार्थी एक डिग्री नियमित माध्यम से और दूसरी डिग्री Open/Distance/Online mode से एक साथ कर सकता है। साथ ही, जिस भर्ती विज्ञापन के आधार पर चयन हो रहा था, उसमें यह शर्त नहीं थी कि समान शैक्षणिक वर्ष में प्राप्त दो डिग्रियों के कारण उम्मीदवार अयोग्य होगा। 🔹 राज्य सरकार का पक्ष राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 के Ordinance 6 के अनुसार एक ही शैक्षणिक वर्ष में एक से अधिक डिग्री परीक्षा देने पर प्रतिबंध है। इसलिए उम्मीदवार को अयोग्य घोषित करना उचित था। ⚖️ हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निष्कर्ष हाई कोर्ट ने कहा कि: • भर्ती विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नहीं थी कि एक ही शैक्षणिक वर्ष में दो डिग्री प्राप्त करने वाला उम्मीदवार अयोग्य होगा। • भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीदवारों के लिए नई अयोग्यता (disqualification) नहीं जोड़ी जा सकती। • सुप्रीम कोर्ट के Tej Prakash Pathak v. High Court of Rajasthan के सिद्धांत के अनुसार भर्ती शुरू होने के बाद “rules of the game” यानी चयन के नियम बीच में नहीं बदले जा सकते। • एक डिग्री Regular mode और दूसरी Distance/ODL/Online mode से करना, संबंधित UGC दिशानिर्देशों के अनुसार, अपने-आप में प्रतिबंधित नहीं है। ✅ अंतिम आदेश हाई कोर्ट ने उम्मीदवार की उम्मीदवारी खारिज करने वाले आदेश को रद्द (quash) कर दिया। सरकार/संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया कि उम्मीदवार की नियुक्ति पर भर्ती विज्ञापन, UGC दिशानिर्देश और लागू कानून के अनुसार नए सिरे से विचार किया जाए। यह प्रक्रिया निर्णय की प्रति प्राप्त होने से 60 दिनों के भीतर पूरी करने को कहा गया। 🎯 प्रतियोगी परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात इस फैसले का मुख्य सिद्धांत: यदि भर्ती विज्ञापन में किसी योग्यता को अयोग्यता नहीं बताया गया है, तो भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उस आधार पर उम्मीदवार को अयोग्य नहीं किया जा सकता। और इस मामले में Regular + Distance/ODL/Online की दो डिग्रियां होने मात्र से उम्मीदवार को अयोग्य घोषित करना हाई कोर्ट ने गलत माना।
Sahyog academy raigarh(cgpsc/cgvyapam): post #20003 — TG.ME
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