क्लाइव का द्वैध शासन प्लासी के युद्ध (23 जून. 1757) का परिणाम बंगाल… — JOB ALERT (Study) — TG.ME

क्लाइव का द्वैध शासन प्लासी के युद्ध (23 जून. 1757) का परिणाम बंगाल विजय के रूप में सामने आया। बंगाल मीर जाफर की महत्त्वाकांक्षा के कारण अराजकता की ओर अग्रसर हुआ, वहीं लॉर्ड क्लाइव ने आंतरिक संघर्ष का लाभ उठाकर कूटनीतिक षड्यंत्रों से बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को युद्ध में परास्त किया। बक्सर के युद्ध (22 अक्तूबर, 1764) के पश्चात् हुई इलाहाबाद की संधि (12 अगस्त, 1765) से अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हो गई। कालांतर में बंगाल के नवाब नज्मुद्दौला से अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी के साथ-साथ निजामत (सूबेदारी) भी प्राप्त हो गई। दीवान और सूबेदार मुगलकालीन प्रांतीय प्रशासन के स्तर पर दो प्रमुख अधिकारी होते थे। दीवानी से अभिप्राय भूमिकर वसूल करना और भूमि कर संबंधी दीवानी मुकदमों का निर्णय करना होता था, जबकि सूबेदारी/निजामत का अभिप्राय आंतरिक सुरक्षा, शांति तथा सुव्यवस्था, न्याय व्यवस्था और फौजदारी मुकदमों का निर्णय करना आदि होता था। कंपनी दीवानी और निजामत के कार्यों का निष्पादन अपने भारतीय अधिकारियों के माध्यम से करती थी। दीवानी कार्य के लिये कंपनी ने बंगाल में रजा खाँ, बिहार में शिताब राये तथा उड़ीसा में रायदुर्लभ को दीवान नियुक्त किया। उपरोक्त व्यवस्था के अतिरिक्त बाकी व्यवस्थाएँ पूर्ववत् ही बनी रहीं। नवाब के अधिकारी और कर्मचारी प्रशासन में दीवानी कार्यों को छोड़कर शेष समस्त कार्य पूर्ववत् ही संपन्न करते रहे। इस प्रकार बंगाल में एक ही समय में दो प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ चलने लगीं। यह एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसमें अधिकार एवं उत्तरदायित्व दोनों को अलग कर दिया गया। इस प्रकार ब्रिटिश कंपनी बंगाल की वास्तविक शासक थी। हालाँकि बंगाल का शासक नवाब ही था और प्रशासन का उत्तरदायित्व भी उसी के हाथों में था, किंतु नवाब के समस्त अधिकार छीन लिये

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August 30, 2026 1.3K