Next Level of GenZs Questions:-
इस लड़के ने एक नई और स्वाभाविक बहस को जन्म दिया है....
जिसके बारे में बात करना अश्लील माना जाता है,
इसे माता पिता का अपमान समझा जाता है
या इस विषय को लेकर कोई चर्चा नहीं करना चाहता ।
ये सवाल पहले भी बहुत बार पूछा गया है...
लेकिन
इस तरह से इसे ट्रोल और वायरल करने का मौका नहीं आया था..।
अधिकांश संस्कृति और सभ्यता की दुहाई देने वाले लोग इस लड़के को ट्रोल कर रहे हैं....
जबकि
ये सवाल संस्कारों और सभ्य व्यवहार से आगे का प्रश्न है ।
कुछ सवाल:-
कितने लोग परमिशन लेकर धरती पर आते हैं ?
कितने पति पत्नी पूरी तैयारी के साथ एक नये जीवन को धरती पर लाने का कार्य करते हैं ?
सच्चाई यही है कि अधिकांश लोग शरीर के आनंद के लिए संभोग करते हैं जिसके परिणामस्वरूप बच्चे पैदा हो जाते हैं ।
सनातन संस्कृति में जब तक गर्भाधान संस्कार का अनुसरण किया जाता था...तब इसे आंशिक रूप से स्वीकार किया जा सकता था
लेकिन
वर्तमान समय और परिस्थितियों में ऐसे संस्कार लगभग समाप्त हो चुके हैं सिर्फ जन्म संस्कार और अंतिम संस्कार बचे हैं...।
बहुत कम लोग इस लड़के के सवाल से सहमत हैं लेकिन वो भी असली सवाल को नजरंदाज कर रहे हैं ।
कोई भी इंसान धरती पर किसी की अनुमति लेकर नहीं आता
लेकिन
अधिकांश माता पिता खासकर शहरी माहौल में रचे बसे माता पिता
सिर्फ कार्पोरेट शक्तियों की गुलामी करने के लिए बच्चे को पैदा करते हैं...,
पालते हैं और पढ़ाते हैं....।
उनके कंधों पर अपने सपनों का पहाड़ लाद देते हैं ।
जिस कारण से बच्चे अपना नैसर्गिक जीवन जीने से वंचित हो जाते हैं..., अवसाद और अलगाव से भर जाते हैं... और
दुर्भाग्यवश ऐसे माता पिता और बच्चों की संख्या करोड़ों में है ।
ये सवाल उन्ही माता-पिता से है और हमेशा रहेगा कि
अगर बच्चों को गुलाम ही बनाना है तो बच्चे पैदा मत करो ।
इससे अगले लेवल के प्रश्न इसके बाद शुरू होंगे कि
अगर हम उस डिवाइन क्रियेटर की मर्जी से धरती पर आए हैं
तो
क्या कार्पोरेट के गुलाम प्यादों की मानसिकता वाले हमारे माता पिता के अप्रासंगिक और अप्राकृतिक सपनों को पूरा करने के लिए की जाने वाली गुलामी के लिए आए थे...?
या
अपनी चेतना में सुधार के साथ...
अपनी ऊर्जा के पोषण के साथ...
अपनी आत्मा के उत्थान के प्रयास के लिए आए थे ?
GenZs उन सवालों को भी निःसंकोच होकर पूछ लेते हैं जिनके लिए हमारी 40-50 साल वाली पीढ़ी यानि मिलेनियल जनरेशन को सरेआम कूटा जा सकता था...।
इस लड़के ने सही सवाल पूछा है क्योंकि ये उस श्रेणी के माता पिता का बेटा है
जो सरकारों और कार्पोरेट की गुलामी को सफलता समझते हैं ।
लेकिन
हमारा सवाल इससे अगले लेवल का होना चाहिए
कि
क्या परमात्मा द्वारा दिए गए जीवन को चलाने के लिए हमें प्रकृति प्रदत्त संसाधनों की जरूरत है या सरकारों और कार्पोरेट की गुलामी की...?
इससे अगले स्तर के प्रश्न हैं:-
बच्चों के जन्म की प्रक्रिया को डिलीवरी ही क्यों कहा जाता है ?
कार्पोरेट लॉबी द्वारा संचालित सरकारें क्यों चाहती है कि हर बच्चे का जन्म हॉस्पिटल में ही हो ?
बच्चे के जन्म पर उसका रजिस्ट्रेशन और पैरों के निशान लेने की प्रक्रिया की वास्तविकता क्या है ?
जब बच्चे को प्रकृति से जुड़ने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है तो उसे नर्सरी, बाल-बाड़ी, आंगनबाड़ी और इश्कूल में भेजने की जल्दबाजी क्यों की जाती है ?
और
ये सवाल सिर्फ Gen-Z & Gen-alpha पूछ सकते हैं.... मिलेनियल ने पूछे होते तो आज ऐसे सवाल पैदा ही न होते ।
मैं इस लड़के के समर्थन में हूं...
इस विषय पर आपके क्या विचार हैं ?
Forwarded fromअहम ब्रहमास्मि तत् त्वमसि
August 5, 2026 84