टीसीएस नासिक में भी वही करते थे थुकलमान जो वे हर जगह करते है:- केवल हिंदू धर्म पर तार्किक चर्चा।
धर्म तर्क से परिपूर्ण प्रश्नोत्तरी से भरा हुआ है। मगर दुनिया का कोई भी रिलिजन या मजहब एक माइक्रोसेकंड भी तर्क सह नहीं सकता है।
ईसाइयत व इस्लाम हिंदू धर्म पर तर्क देंगे, लेकिन जैसे ही कोई हिंदू उनके रिलिजन या मजहब पर तर्क देगा तो तुरंत BLASPHEMY या गुस्ताखी चिल्ला कर पुलिस या भीड़ को बुला लेंगे।
उदाहरण के लिए टीसीएस नासिक में गणेश जी पर प्रश्न करने वाले थुकलमान से उसका हिंदू सहकर्मी अगर उसके श्रद्धेय के चरित्र के किसी किस्से पर प्रश्न करता तो वो थुकलमान सहकर्मी हिंसक हो जाता ही, और दुनिया भर में दंगे भी आरंभ हो जाते।
अपने बच्चे को बताइए कि स्कूल या कार्यालय में जैसे ही कोई थुकलमान या ईसाई धर्म पर चर्चा करे तो उसे तुरंत उत्तर दे, "धर्म पर कोई चर्चा नहीं होगी। पढ़ने या नौकरी करने आए हो, करो और घर जाओ। क्यूंकि मैं तुम्हारे रिलिजन / मजहब पर कुछ बता दूँगा तो हिंसा आरम्भ हो जाएगी।"
अपने बच्चे को बताइये कि ऐसे लोगो के साथ फुटबॉल नहीं खेली जाती है जो दूसरो के हाथ से किए गोल को फ़ाउल बताए, लेकिन अपने हाथ से गोल करने के अधिकार को religious right या मज़हबी हक़ बताए।
आप फिर भी उनके साथ खेल रहे है तो आप सदैव हारेंगे।
जीवन हो या खेल हो, नियम सबके लिए समान ना हो तो जीवन या खेल संभव नहीं है।
@Hindu
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4April 14, 2026 13.1K 15 8