दोयम दर्जे के नागरिक हुए संस्कृत छात्र, गाली की भाँति अपने कुलीन… — Hindu 🚩 — TG.ME

दोयम दर्जे के नागरिक हुए संस्कृत छात्र, गाली की भाँति अपने कुलीन आस्पद ढोते ब्राह्मण, पीढ़ियों से कपट और गैरबराबरी के षडयन्त्र का अपमान सहते पण्डित क्या किसी स्वर्णयुग में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस समय प्रचलित दावे के अनुसार जो पारायण सौ-दो सौ सालों में एक बार सम्भव हुआ है, उससे वैदिक युग पुनः आने वाला है क्या।

मुझे लगता है, यह विद्यार्थी की मेधा का उत्सव है। यह एक पुण्यशील माता-पिता की सिद्धि है। यह एक योग्य आचार्य का आशीर्वाद है। यह आश्वस्ति है कि बीज का नाश नहीं होता, पर बीज के दाने से भण्डारा नहीं होता। उसके लिये खेती और अच्छी उपज की अपेक्षा होती है और अनुकूल ऋतु की भी।

इण्टरनेट की हाइप और सोशल मीडिया अल्गोरिदम के छलावे के बाद, मुकुट और माला की चित्रावलियों के बाद इस प्रसंग की फलश्रुति क्या होगी। यह अप्रतिम छात्र जब अपने रटे हुए मन्त्रों के अर्थ समाज-जीवन में खोजने निकलेगा तो उसे क्या मिलेगा। जातीय जनगणना कराती सरकारें, जातिवाद मिटाने को संकल्पित संविधान, जन्मगत श्रेष्ठता को अमान्य करता समाजशास्त्र तथा कुल-गोत्र को निरस्त करते लोगों के बीच इस उत्साह की कोई वास्तविक भूमि भी है क्या।

सोचना चाहिए।

बधाई हो आयुष्मान् देवव्रत महेश रेखे, हमें इस पारायण में उपस्थित होने का आग्रह था, इच्छा भी थी पर सम्भव नहीं हुआ। पुनः बधाई..धर्मशील माता-पिता और यशस्वी गुरु भी वन्दनीय हैं।

इस उल्लास की अर्थवत्ता का विचार हो सके इसकी शुभकामना। प्रतीकात्मक स्वागत से आगे बढ़कर इस परम्परा की प्रतिष्ठा हो सके ऐसी आशा।

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December 4, 2025 19.5K 23 7