*जब लोग हर हाल में कहेंगे, तो अपने अनुसार क्यों न जिएँ?*
जब तुम उनके अनुसार जीते हो, तब भी लोग कहेंगे।
जब अपने अनुसार जीते हो, तब भी लोग कहेंगे।
तो फिर क्यों न अपने अनुसार जिया जाए?
तुम्हें अपने जीवन का उत्तरदायित्व स्वयं लेना होगा, क्योंकि अंततः जिंदगी तुम्हें जीनी है, समाज को नहीं।
दूसरों की राय को सुनो, लेकिन उसे अपने जीवन का निर्णय मत बनने दो।
दर्पण तुम्हारा चेहरा दिखा सकता है,
लेकिन तुम्हें कौन बनना है, इसका निर्णय तुम्हें ही करना होगा।
अपने अनुसार जियो, लेकिन विवेक के साथ।
दूसरों को नीचा दिखाने के लिए नहीं,
बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप को जीने के लिए।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
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3August 8, 2026 6.4K 12