चाय की टपरी मैं और शाम!✨️
शाम के समय,जब सूरज अपनी किरणें छिपाने लगता है, वैसे ही मैं घर में कार्य के बाद ऊब रहा होता हूँ और निकलता हूं किसी चाय की टपरी पर बैठ जाता हूं घंटे-घंटों वहां मैं!
मेरे पास कोई नहीं होता है,न परिवार,न दोस्त,न कोई अपना, मगर मैं भीड़ में दिखता हूं हमेशा और उसी चाय की टपरी पर बैठकर भीड़ के बीच अपने अकेलेपन को भूल जाता है।
चाय की चुस्की लेता हूं और अपने आसपास के लोगों को देखता हू,सोचता हूं,समझता हूं,देखता हूं कि कैसे लोग अपने काम से घर लौट रहे हैं,कैसे बच्चे खेल रहे हैं, और कैसे लोग अपने दोस्तों के साथ समय बिता रहे हैं। मैं इन सबको देखकर खुद को अकेला महसूस करता हूं,लेकिन चाय की टपरी पर बैठकर मैं बिल्कुल अकेला नहीं महसूस करता हूं।
चाय की टपरी मेरे लिए एक आश्रय है,जहां मैं अपने अकेलेपन को भूलकर कुछ समय के लिए खुश रह सकता हूं। मैं चाय की चुस्की लेता हूं और अपने आप से कहता है। अकेला हूँ, लेकिन अकेलेपन के लिए नहीं हूं। @adv_abhishek_dwivedi07 ✍️
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