कर्नाटक सरकार ने जन स्वास्थ्य की रक्षा और उपभोक्ता पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 17 अगस्त 2026 से एक साल के लिए 'पनीर' के नाम पर बेचे जाने वाले एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
मुख्य बातें:👇🏻👇🏻👇🏻
प्रतिबंध की अवधि: यह रोक 17 अगस्त 2026 से शुरू होकर एक वर्ष (17 अगस्त 2027 तक) के लिए लागू की गई है।
एनालॉग पनीर क्या है: यह दूध की मलाई (milk fat) या ठोस पदार्थों की जगह सस्ते वनस्पति तेल (vegetable oil) और वसा (fat) का उपयोग करके बनाया जाने वाला एक गैर-डेयरी विकल्प है।
यह फैसला क्यों लिया गया: खाद्य सुरक्षा और औषधीय प्रशासन के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में केवल मानक दूध से बने पनीर की ही बिक्री हो और लोगों को भ्रमित न किया जाए।
किस पर लागू है: यह प्रतिबंध रेस्टोरेंट, होटल, केटरर्स और अन्य खाद्य कारोबारियों पर भी लागू है जो किसी भी व्यंजन को बनाने में एनालॉग पनीर का इस्तेमाल या भंडारण करते हैं।
किन उत्पादों पर छूट: फ्रोजन डेसर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड-फैड स्प्रेड जैसे अलग से मानकीकृत (standardised) खाद्य पदार्थों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है क्योंकि वे अलग नियमों के तहत आते हैं। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने भी ऐसा ही प्रतिबंध लगाया था।
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