आपका ये लेख GDS के 3 लाख साथियों की आवाज है 📮✊
### *ग्रामीण डाक सेवक: सिविल पद, असमान अधिकार*
भारत की एक अजीब विडंबना है। लोग पूरी जिंदगी सरकार की सेवा करते हैं, सरकार की योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाते हैं, जनता के विश्वास का प्रतीक बनते हैं, फिर भी सरकार उन्हें पूरी तरह अपना कर्मचारी नहीं मानती। यह किसी एक की नहीं, पूरे देश के लगभग 3 लाख ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) की कहानी है।
हाल ही में संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मसानी ने संसद में कहा कि GDS प्रणाली सरकारी नौकरी की सुरक्षा और प्राइवेट की प्रोत्साहन व्यवस्था का संगम है। सवाल और तेज हो जाता है - अगर ये सरकारी सेवा है तो GDS को केंद्रीय कर्मचारी क्यों नहीं माना जाता? अगर वे सरकारी काम, सरकारी नियंत्रण में करते हैं तो उन्हें ‘नियुक्ति’ की जगह ‘एंगेजमेंट’ क्यों दिया जाता है? कागज पर 3 से 5 घंटे की ड्यूटी, हकीकत में पूरा दिन काम क्यों?
*आंकड़े क्या कहते हैं:*
डाक विभाग की 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार देश में 1,64,999 डाकघर हैं, जिनमें 1,49,385 (90.41%) ग्रामीण इलाकों में हैं। 1,95,754 विभागीय कर्मचारियों के मुकाबले 2,78,633 GDS हैं। यानी कुल स्टाफ का 58.74% GDS हैं। आज GDS सिर्फ डाकिया नहीं, बैंकर, बीमा एजेंट, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा देने वाले हैं। COVID में जब सब घर में थे, GDS ने गाँव-गाँव में कैश, पेंशन, दवाइयां पहुँचाई।
*कानूनी स्थिति:*
1. *1977 - P.K. Rajamma केस:* सुप्रीम कोर्ट ने कहा Extra-Departmental Agent (आज के GDS के पूर्व रूप) केंद्र के अधीन सिविल पद धारण करते हैं और उन्हें अनुच्छेद 311 का संरक्षण मिलेगा।
2. *2014 - विनोद कुमार सक्सेना केस:* सुप्रीम कोर्ट ने फिर माना GDS सिविल पदधारी हैं और CAT में जा सकते हैं।
3. *2016 - CAT का आदेश:* CAT ने कहा - जो GDS नियमित ग्रुप-D में गए, उनकी पूरी GDS सेवा पेंशन में जुड़ेगी, और जो GDS के रूप में ही रिटायर हुए, उनकी 5/8 सेवा पेंशन में गिनी जाए। (ये सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं, CAT का था)
4. *Gandiba Behera केस:* सुप्रीम कोर्ट ने कहा GDS सेवा अलग नियमों से चलती है, इसलिए नियमित नौकरी में आने के बाद पेंशन की क्वालिफाइंग सर्विस में ऑटोमेटिक नहीं जुड़ेगी।
5. *31 अक्टूबर 2025 - दिल्ली हाईकोर्ट:* Buta Ram केस में CAT के 2016 वाले पेंशन के आदेश को रद्द कर दिया।
*सबसे बड़ी असमानता - वेतन आयोग:*
GDS को 7वें वेतन आयोग से बाहर रखा गया। सरकार ने खुद 14 मार्च 2018 को लोकसभा में बताया कि "ग्रामीण डाक सेवक 7वें वेतन आयोग के दायरे में नहीं आते" और उनके लिए अलग One-Man Committee बनाई गई। जब नियमित कर्मचारियों का वेतन-भत्ता देश का वेतन आयोग तय करता है, GDS के लिए अलग विभागीय कमेटी क्यों?
*मूल सवाल:*
प्रधानमंत्री और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने GDS के काम की तारीफ की है। पर क्या तारीफ पेंशन की जगह ले सकती है? जो दूसरों को 30-40 साल पेंशन बांटता है, क्या वो खुद बिना पेंशन के रिटायर होगा?
GDS दान नहीं, हक मांग रहे हैं - नियमितीकरण, केंद्रीय कर्मचारी का दर्जा, उचित वेतन, पेंशन, मेडिकल सुरक्षा और वेतन आयोग में शामिल होना।
अंतिम सवाल यही है: एक व्यक्ति को सरकार की सेवा करने के कितने दशक बाद सरकार उसकी भविष्य की जिम्मेदारी लेगी? GDS को सिर्फ शाबाशी नहीं, गणतंत्र के सच्चे सेवक के रूप में पूरी पहचान, गरिमा और सामाजिक सुरक्षा कब मिलेगी?
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1August 22, 2026 2.1K