My experience of last 4 interview तैयारी को जितना बेसिक और सिंपल रखोगे इतना फायदा है, कम पढ़ो लेकिन अच्छा से पढ़ो।जिसका आंसर दे रहे अच्छे से दो जिसका नहीं पता सॉरी बोलके निकल जाओ। मॉक जितना कम दो उतना अच्छा है। बिना तैयारी/ कम तैयारी से एक मॉक एक मॉक अच्छे से तैयारी के बाद।ज्यादा मॉक दोगे अलग अलग फीडबैक मिलेंगे जबरन कन्फ्यूज होगे। अपनी नेचुरल बॉडी लेंग्वेज, टोन , स्माइल को कैरी करना ज्यादा फायदेमंद है ना कि फीडबैक के आधार पे बनावटी पर्सनेलिटी बनाना। जो पहले से जॉब में नहीं उनसे करेंट , हॉबी, ग्रेजुएशन के क्वेश्चन ज्यादा पूछे जाते है जो जॉब में ही उनसे जॉब रिलेटेड। हॉबी आपकी अपनी होनी चाहिए जिसमें कंफर्टेबल होके जवाब दे सको, देखा देखी में हॉबी मत बदलो। जितना माइंड शांत रखोगे उतना फायदे में रहोगे। डेली न्यूजपेपर रीडिंग बहुत जरूरी है। करेंट के क्वेश्चन लगभग कवर हो जाते है । कुछ यूनिवर्सल क्वेश्चन जैसे सिविल सेवा में क्यों आना चाहते, आपकी खूबियां/कमी क्या है, इन सबको अच्छे से तैयार करके रखो, वहां पे हम अपनी खूबियां/कमी भी ठीक से नहीं बता पाते। मॉक इंटरव्यू अच्छा जाए या ना जाए ज्यादा टेंशन/कॉन्फिडेंस में नहीं आना बेसिक्स पे फोकस करना , एक्चुअल इंटरव्यू बिल्कुल अलग होने वाला है। आंसर फ्रेमिंग और स्ट्रक्चर पे थोड़ा ध्यान देना है। क्या बोल रहे से ज्यादा कैसे बोल रहे ये मायने रखता है। In short Keep it simple, jo ho wahi raho, confidence se interview dilao. marks is not in your hand . All the best
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