20 साल की उम्र में बिट्टू ‘तबाही’ ने उठाया नदी बचाने का बीड़ा
20 साल की उम्र में जब अधिकांश युवा अपने भविष्य और करियर की चिंता में व्यस्त रहते हैं, मध्य प्रदेश के बीएससी छात्र बिट्टू तबाही ने एक अलग ही मिसाल पेश की। बिना दस्ताने और बूट के, यहां तक कि तैरना भी न जानते हुए, वे सीधे गंदे पानी में उतर गए और नदी की सफाई का जिम्मा अपने कंधों पर उठा लिया।
26 जनवरी 2026 को ब्यावरा में एक मंदिर के पास स्थित अज्नार नदी की बदहाल स्थिति देखकर बिट्टू ने उसकी सफाई का संकल्प लिया। नदी में जमा प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य कचरे को उन्होंने अपने हाथों से बाहर निकालना शुरू किया। जिस खूबसूरत नदी को लोगों ने कूड़ेदान में बदल दिया था, उसे फिर से साफ और स्वच्छ बनाने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की।
बिट्टू ने केवल सफाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने नदी से निकलने वाले पूजा के कचरे से खाद बनाने की पहल भी शुरू की। अभियान के लिए जरूरी औजार और कूड़ेदान खरीदने में उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पैसे जुटाए। इस पूरी मुहिम में उनकी जेब से करीब ₹30,000 खर्च हुए।
यह सफाई अभियान उनके लिए आसान नहीं था। लगातार गंदे पानी में काम करने के कारण एक समय उनके हाथों में इन्फेक्शन तक हो गया, लेकिन उन्होंने अपना प्रयास नहीं छोड़ा।
जब उनके इस काम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया के जरिए हजारों लोगों तक पहुंचीं, तो जहां कई लोगों ने उनकी सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि वे केवल लाइक्स और शोहरत के लिए ऐसा कर रहे हैं। लेकिन आलोचनाओं के बावजूद बिट्टू अपने काम में जुटे रहे।
नाम में भले ही ‘तबाही’ जुड़ा हो, लेकिन असल जिंदगी में बिट्टू जिस तबाही से लड़ रहे हैं, वह है जल प्रदूषण की तबाही।
उनकी कहानी हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—बदलाव के लिए हमेशा किसी दूसरे के आगे आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। बदलाव की शुरुआत तब होती है, जब कोई एक व्यक्ति खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला करता है।
बिट्टू ने यही किया—शिकायत करने के बजाय नदी में उतरे, कचरा निकालना शुरू किया और दूसरों के लिए एक उदाहरण कायम कर दिया।
8September 4, 2026 811 4