पूज्य पण्डित जी के अनुसार भगवती राधा ही महाविद्या मातंगी का स्वरूप हैं तथा श्री परमहंस शुकदेव जी उनके दिव्य शुक (तोते) हैं। यह प्रतीकात्मक संबंध अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ रखता है। 'राधा' नाम का तात्त्विक अर्थ उस आदिशक्ति से है जो 'र' अर्थात् ब्रह्म को धारण, प्रकट और अभिव्यक्त करती हैं। वे ही सनातन मूलप्रकृति हैं, जिनसे समस्त सृष्टि, शक्ति और चेतना का प्राकट्य होता है। इस दृष्टि से श्री परमहंस शुकदेव जी, उनके शुक के रूप में, उस दिव्य वाणी के संवाहक हैं जो भगवती राधा के परमानन्दमय स्वरूप और परम तत्त्व का जगत में उद्घोष करती है।
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1July 11, 2026 262 3