𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫 मुझे बार-बार आज़माते हो क्यों बार-बार दिल दुखाते हो… — 𝐒𝐡𝐚𝐲𝐚𝐫𝐢𝐬𝐚𝐡 ꨄ︎ — TG.ME

𝐿 𝞲 𝟆 𝞮 :) 💫


मुझे बार-बार आज़माते हो
क्यों बार-बार दिल दुखाते हो

मैं सिलता हूँ ज़ख़्मों को
तुम बार-बार उधेड़ जाते हो

किसने दे दी है सुपारी तुम्हें
जो मुझे मारना चाहते हो

लफ़्ज़ों की कमी है क्या
तुम हम्म हम्म बताते हो

समय कहते हो है ही नहीं
और वक़्त बिताना चाहते हो

ख़ुद तो उलझे रहते ही हो
मुझे भी क्यों उलझाते हो

करते हो काम इश्क़ वाले
नाम दोस्ती का दे जाते हो

मर्ज़ी से अलविदा कर देते हो
मर्ज़ी से लौट आते हो

सीधे-सीधे कह डालो, जां
आख़िर मुझसे क्या चाहते हो...!!

💌🙌🏻


𝚳𐍂...MEET...✍🏻
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August 30, 2026 122 1