कह ना पायें, जो उनके लब
वो आँखें, कह देती हैं सब
पहले तो सबका इक ही था
अब सबका अपना अपना रब
हालत तो देखो इन्सां की
खुद ही से डरता है वो अब
तनहा काटो तब पूछेंगे
होती है कितनी लम्बी शब
खुद को भी मुजरिम पाओगे
अपने भीतर, झांकोगे जब
हरदम आंसू, मत छलकाओ
मन मर्ज़ी का, होता है कब
Forwarded fromEssay for UPSC with Aditya sir
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3June 12, 2026 1.8K 4