जैन धर्म (Jainism) UPSSSC PET परीक्षा के प्राचीन इतिहास पाठ्यक्रम का… — History ( इतिहास) — TG.ME

जैन धर्म (Jainism) UPSSSC PET परीक्षा के प्राचीन इतिहास पाठ्यक्रम का एक प्रमुख विषय है। परीक्षा की दृष्टि से सभी महत्वपूर्ण एवं बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य नीचे सूचीबद्ध हैं।। 1. सामान्य परिचय एवं तीर्थंकर।। 'जैन' शब्द की उत्पत्ति: 'जिन' शब्द से हुई है, जिसका अर्थ 'विजेता' (इंद्रियों पर विजय पाने वाला) होता है। तीर्थंकरों की संख्या: जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए। प्रथम तीर्थंकर (संस्थापक): ऋषभदेव (आदिनाथ)। इनका प्रतीक सांड (बैल) है। 23वें तीर्थंकर: पार्श्वनाथ। इनका प्रतीक सर्प (सांप) है। इन्होंने 4 महाव्रत (सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह) दिए थे। 24वें एवं वास्तविक संस्थापक: महावीर स्वामी। इनका प्रतीक सिंह (शेर) है। 2. महावीर स्वामी का जीवन परिचय (PET विशेष) जन्म: 599 ई.पू. / 540 ई.पू. (वैशाली के पास कुंडग्राम में)। पिता: सिद्धार्थ (ज्ञातृक कुल के प्रधान)। माता: त्रिशला (लिच्छवी राजा चेटक की बहन)। पत्नी: यशोदा | पुत्री: अनोज्जा (प्रियदर्शना)। प्रथम शिष्य: उनका दामाद जामालि। गृहत्याग: 30 वर्ष की आयु में बड़े भाई नंदीवर्धन की अनुमति से। ज्ञान प्राप्ति (कैवल्य): 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद 42 वर्ष की आयु में जृंभिक ग्राम के पास ऋजुपालिका नदी के तट पर शाल वृक्ष के नीचे। निर्वाण (मृत्यु): 72 वर्ष की आयु में 468 ई.पू. में पावापुरी (बिहार) में। 3. सिद्धांत एवं त्रिरत्न।। पंच महाव्रत: अहिंसा (हिंसा न करना - सबसे महत्वपूर्ण) सत्य (झूठ न बोलना) अस्तेय (चोरी न करना) अपरिग्रह (धन का संचय न करना) ब्रह्मचर्य (यह 5वां व्रत महावीर स्वामी ने जोड़ा था) त्रिरत्न (Three Jewels): सम्यक् दर्शन (सच्ची श्रद्धा) सम्यक् ज्ञान (सच्चा ज्ञान) सम्यक् आचरण (सच्चा कर्म/व्यवहार) स्याद्वाद / अनेकांतवाद: यह जैन धर्म का प्रमुख दार्शनिक सिद्धांत है (किसी वस्तु के अनेक पहलुओं को देखने का दृष्टिकोण)। ईश्वर एवं आत्मा: जैन धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है, लेकिन आत्मा की मान्यता है। यह पुनर्जन्म और कर्मवाद में विश्वास रखता है। 4. जैन संप्रदाय एवं प्रमुख ग्रंथ | दो संप्रदाय: श्वेतांबर: सफेद वस्त्र धारण करने वाले (अनुयायी: स्थूलभद्र)। दिगंबर: नग्न रहने वाले (अनुयायी: भद्रबाहु)। प्रमुख साहित्य: जैन साहित्य को 'आगम' कहा जाता है। जैन धर्म के प्रारंभिक ग्रंथ अर्द्धमागधी/प्राकृत भाषा में लिखे गए। कल्पसूत्र: जैन तीर्थंकरों का जीवनचरित, जिसकी रचना भद्रबाहु ने संस्कृत में की थी। UPSSSC PET हेतु त्वरित वन-लाइनर तथ्य..! जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर कौन थे? — महावीर स्वामी महावीर स्वामी को ज्ञान प्राप्ति किस नदी के तट पर हुई थी? — ऋजुपालिका नदी जैन धर्म के 'त्रिरत्न' कौन-कौन से हैं? — सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् आचरण 'कल्पसूत्र' की रचना किसने की थी? — भद्रबाहु जैन साहित्य को क्या कहा जाता है? — आगम प्रथम जैन संगीति कहाँ आयोजित की गई थी? — पाटलिपुत्र

August 11, 2026 1.1K