मतीरे की राड़ 1644
▪️जोधपुर के स्वामी गजसिंह का ज्येष्ठ पुत्र अमर सिंह था परंतु कुछ कारणों से उसे अपना उत्तराधिकारी न बनाकर गजसिंह ने अपने छोटे पुत्र जसवंत सिंह को गद्दी का स्वामी नियत किया तब अमर सिंह बादशाह की सेवा में चला गया वहां उसे राव का खिताब और नागौर की जागीर मिल गई थी
▪️जोधपुर और बीकानेर की सीमा मिली हुई होने से उन दोनों राज्यों में परस्पर झगड़ा बना ही रहता था कुछ दिनों बाद अमर सिंह ने बीकानेर की सीमा के जाखांणीया गांव पर भी अपना अधिकार कर लिया
▪️जब करण सिंह को इसकी सूचना दिल्ली में मिली तो उसने अपनी सेना को वहां से उसका(अमरसिंह)थाना उठवा देने की आज्ञा भेजी
▪️उन दिनों मुहत्ता जसवंत बीकानेर का दीवान था वह महाजन भूकरका, सिधमुख आदि के सरदारों के साथ फौज लेकर नागौर पर चढ़ गया
▪️अमर सिंह की तरफ से केसरीसिंह ससैन्य मुकाबले के लिए जाखांणीया गांव आया परंतु उसे हार कर भागना पड़ा
▪️यह लड़ाई 1644 में हुई इसमे नागौर के कई राजपूत काम आए
▪️जब अमरसिंह को इसकी खबर दिल्ली मिली तो उसे बड़ा अफसोस हुआ और उसने वहां से जाने की आज्ञा मांगी, परंतु उसी समय करण सिंह ने अमर सिंह के जाखांणीया लेने तथा युद्ध होने का सारा हाल बादशाह से निवेदन कर दिया जिस पर बादशाह ने अमर सिंह को दरबार में रोके रखा ।
September 7, 2026 166