सोनारगढ़ दुर्ग ( जैसलमेर) 1. इस दुर्ग को उत्तर भड़ किवाड़ कहते है। 2. यह दुर्ग धान्व व गिरी श्रेणी का दुर्ग है। 3. यह दुर्ग त्रिकुट पहाड़ी/ गोहरान पहाड़ी पर बनी है। 4. दुर्ग के अन्य नाम - गोहरानगढ़ , जैसाणागढ़ 5. स्थापना -राव जैसल भाटी के द्वारा 1155 ई. में हुआ। 6. दुर्ग निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं हुआ है। 7. पीले पत्थरों से निर्मित होने के कारण स्वर्णगिरि कहलाती है। 8. इस किले में 99 बुर्ज है। 9. यह दुर्ग राजस्थान में चित्तौड़गढ के पश्चात् सबसे बडा फोर्ट है। 10. जैसलमेर दुर्ग की सबसे प्रमुख विशेषता इसमें ग्रन्थों का एक दुर्लभ भण्डार है जो जिनभद्र कहलाता है। ▪️सन् 2005 में इस दुर्ग को वर्ल्ड हैरिटेज सूची में शामिल किया गया। 11. आस्कर विजेता " सत्यजीतरे" द्वारा इस दुर्ग फिल्म फिल्माई गई। 🔷जैसलमेर में ढाई साके होना लोकविश्रुत है। 1.पहला साका - ▪️दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलज्जी व भाटी शासक मूलराज के मध्य युद्ध हुआ। 2.द्वितीय साका - ▪️फिरोज शाह तुगलक के आक्रमण रावल दूदा व त्रिलोक सिंह के नेतृत्व मे वीरगति प्राप्त की। 3.तीसरा साका - ▪️जैसलमेर का तीसरा साका जैसलमेर का अर्द्ध साका राव लूणसर में 1550 ई. में हुआ। ▪️आक्रमणकत्र्ता कन्द शासक अमीर अली था। 🔻प्रसिद्व उक्ति 1. गढ़ दिल्ली, गढ़ आगरा, अधगढ़ बीकानेर। 2. भलो चिणायों भाटियां, गढ ते जैसलमेर। ▪️अबुल फजल ने इस दुर्ग के बारे में कहा है कि केवल पत्थर की टांगे ही यहां पहुंचा सकती है।
1